बांदा। मोहर्रम माह की आखिरी रात छावनी मोहाल में जलसा शोहदाए कर्बला हुआ। हाफिज फारूक ने तिलावत कर जलसे का आगाज किया। मौलाना शफीकुद्दीन ने शहीदाने कर्बला के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने इमाम हुसैन की शहादत पर रोशनी डाली। मौलाना सैय्यद गौहर रब्बानी ने हजरत इमाम की शहादत और मर्तबा बयां किया। मौलाना सैय्यद महमूद रब्बानी ने शहादत के बाद मदीने तक के सफर के बारे में बताया।
कादिर अफजाल ने मनकबत और हमजा नियाजी, नूर मोहम्मद, हाफिज मुनव्वर, मेराजुल हसन, सैय्यद सरवर रब्बानी, कारी सैय्यद अशर रब्बानी, शोएब नियाजी ने नात पेश कीं। संचालन मीर साहब (जबलपुर) और सदारत अब्दुल हफीज नियाजी उर्फ गुलाम साबिर ने की। अंजुमन मोहम्मदिया के सदस्यों ने इंतजाम किए।