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संकटग्रस्त किसानों पर रुख स्पष्ट करे सरकार

Fri, 08 May 2015 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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ओलावृष्टि और बारिश से फसलों की बर्बादी झेल रहे किसानों के सभी कर्ज माफी के मुद्दे को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संज्ञान में लिया है। उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि संकटग्रस्त किसानों और ऋण माफी योजना के बारे में सरकार की क्या पालिसी (नीति) है। हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 मई तारीख निर्धारित की है।
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फरवरी माह से अब तक कई बार बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। पहले से ही तंगहाली के दौर से गुजर रहे किसानों के लिए कुदरत का यह कहर असहनीय साबित हो रहा है। बड़ी संख्या में किसान सुसाइड कर रहे हैं या सदमे में मौत हो रही हैं।

राजनीतिक दल और अन्य संगठन लगातार यही मांग कर रहे हैं कि केंद्र और प्रदेश सरकारें किसानों के सभी कर्ज पूरी तरह माफ करें, लेकिन दोनों सरकारें चुप्पी साधे हुए हैं। हाल ही में बांदा आए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तो किसानों पर चढ़े कर्ज को माफ करने से साफ इंकार कर दिया।
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चित्रकूट जनपद के अधिवक्ता ओम प्रकाश चौबे ने पिछले माह इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी। अपने अधिवक्ता के माध्यम से दायर की याचिका में कहा कि प्राकृतिक आपदा सेे किसान बर्बाद हो गया है।

किसानों ने क्रेडिट कार्ड से कर्ज ले रखा है, जिसे चुकाने की चिंता में अब तक प्रदेश के 1200 किसान मौत को गले लगा चुके हैं, लेकिन सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इसे सामान्य मौत बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
याचिका में कोर्ट से गुजारिश की गई कि किसानों द्वारा क्रेडिट कार्ड से लिया गया पूरा कर्ज माफ करने की व्यवस्था कराई जाए।

इसके अलावा एक लाख से तीन लाख तक के अन्य कर्ज का 50 फीसदी और उससे अधिक कर्ज की 25 फीसदी राशि माफ की जाए। यही नहीं अगले दो वर्षों तक कर्ज का ब्याज पूरी तरह माफ रहे। याचिका में सभी किसानों को समान रूप से मुआवजा दिलाने की बात कही गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा 33 फीसदी फसल नुकसान के मुआवजे की घोषणा को अमलीजामा पहनाने का अनुरोध किया गया है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने 4 मई को आदेश जारी कर प्रदेश सरकार के स्थायी अधिवक्ता (चीफ स्टैंडिंग कौंसिल) के जरिए राज्य सरकार से पूछा है कि संकटग्रस्त किसानों और ऋण माफी के बारे में सरकार अपना रुख स्पष्ट करे और उच्च न्यायालय को अवगत कराए। उच्च न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 12 मई निर्धारित की है।
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