बांदा। सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की प्रदेश सरकार की योजना में भी सरकारी एजेंसियों ने कमाई का जरिया निकाल लिया है। अपनी चहेती कंपनी से टैंकर खरीदने के लिए स्थानीय निकायों को लखनऊ की एक फर्म का पता दिया गया है, जो नियम के विपरीत है। यह पता प्रभारी अधिकारी की ओर से जारी पत्र में हाथ से लिखा गया है। प्रभारी अधिकारी का कहना है कि इस बारे में वह फाइल देखकर ही कुछ बता पाएंगे।
उन्होंने अपने पत्र में हाथ से कुछ नहीं लिखा। न ही किसी फर्म से खरीद के लिए निकायोें पर दबाव डाला जा सकता है। पत्र में अलग से लिखे गए फर्म के पते में किसी अधिकारी या कर्मचारी के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। इतना ही नहीं एक ही किस्म के टैंकरों के लिए अलग-अलग रेट को मंजूरी दी गई है।
स्थानीय निकायों को 14वें वित्त आयोग से टैंकर खरीदने के लिए पैसा दिया गया है। निकायों के प्रभारी/सिटी मजिस्ट्रेट आरके श्रीवास्तव ने जिले के सभी नौ स्थानीय निकायोें को टैंकर खरीदने संबंधी पत्र हाल ही जारी किया है। इसमें किस निकाय को कितने टैंकर किस दर से खरीदने हैं, यह दर्शाया गया है। एक ही मानक वाले टैंकर कहीं एक लाख 89 हजार तो कहीं एक लाख 95 हजार में खरीदे जाने की मंजूरी दी गई है।
प्रभारी अधिकारी की ओर से जारी पत्र के अंत में हाथ से लखनऊ की एक कंपनी का नाम, मोबाइल नंबर और पूरा पता लिखा गया है। इसमें यह भी लिखा है कि नगर पालिका परिषद बांदा ने इसी कंपनी से टैंकर खरीदे हैं। यहां सवाल यह है कि निकायों को अपने स्तर से टैंकर खरीदने की छूट दी गई है, ताकि वह कम से कम दरोें पर टैंकर खरीद सकें तो फिर पत्र मेें लखनऊ फर्म की ओर इंगित किया जाने का क्या मतलब है।
टैंकरों की यह योजना बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर में लागू है। गांवों में ग्राम पंचायतों और निकायों में नगर पालिका या नगर पंचायत की ओर से टैंकर खरीदे गए।
बांदा नगर पालिका को एक लाख 89 हजार प्रति टैंकर की दर से पांच टैंकर खरीदने की मंजूरी दी गई। अतर्रा नगर पालिका और बबेरू व ओरन नगर पंचायतों मेें यही टैंकर एक लाख 95 हजार में खरीदे गए। नरैनी, मटौंध और तिंदवारी नगर पंचायतों में टैंकर की कीमत एक लाख 93 हजार रुपये दी गई। सभी नौ निकायों में कुल 22 टैंकरों के लिए 42 लाख 90 हजार रुपये दिए गए। बांदा नगर पालिका को लखनऊ की एक फर्म ने टैंकर आपूर्ति किए हैं।
फाइल देखकर ही बता पाएंगे प्रभारी अधिकारी
बांदा। प्रभारी अधिकारी (स्थानीय निकाय) सिटी मजिस्ट्रेट आरके श्रीवास्तव का कहना है कि स्थानीय निकायों को टैंकर खरीदने के संबंध में जारी विवरण पत्र में बाद में हाथ से लिखे गए फर्म के पते के बारे में उन्हें पता नहीं है। यह तो फाइल देखकर ही बता पाएंगे। वह हजारों हस्ताक्षर करते हैं। ऐसे में सब कुछ याद नहीं रहता।
फाइल अधिशासी अधिकारी के पास है। वह बेहतर बता सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई इबारत पत्र में हाथ से बढ़ाई जाए तो उस पर इबारत बढ़ाने वाले के हस्ताक्षर जरूर होने चाहिए (पत्र में लिखे गए फर्म के पते के नीचे किसी के हस्ताक्षर नहीं है)। इस बारे में नगर पालिका के ईओ वीके श्रीवास्तव से संपर्क करना चाहा तो उन्हें फोन रिसीव नहीं किया।