बांदा। जिस्म पर साधारण और पुराने कपड़े, बड़े बाल और डाढ़ी और सिर पर टोपी। यह पहचान है शिल्पकार हामिद हुसैन उर्फ निश्तर बांदवी की। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक नजरे इनायत ने उन्हें उत्तर प्रदेश के यशस्वी सम्मान ‘यश भारती’ से नवाजा है। यह सम्मान उन्हें बृहस्पतिवार 27 अक्तूबर को लखनऊ में आयोजित समारोह में मिलेगा। चित्रकूटधाम मंडल में शायद किसी शिल्पकार को पहली बार यह सम्मान मिल रहा है।
शहर के मर्दननाका निवासी हामिद हुसैन 12 साल की उम्र से शजर पत्थर तराशने का काम कर रहे हैं। उन्हें यह हुनर अपने नाना मोहम्मद इलियास से हासिल हुआ था। तब से यह लगातार इस काम में लगे हैं। कभी किसी स्कूल में नहीं पढ़े। हालांकि अब 53 की उम्र होने के साथ ही बीमारी ने जिस्म जर्जर कर दिया है। उसके बाद भी पत्थर काटने का काम नहीं छोड़ा। एक दशक पहले इराक, ईरान, सऊदी अरब और बंगलादेश से शजर के खरीदार आते थे वह अच्छी कीमत देकर जाते थे लेकिन अब उनकी आमद बंद हो गई।
बेहद ईमानदार और नमाज-रोजा के पाबंद हामिद शायर भी हैं। ‘निश्तर बांदवी’ के नाम से मशहूर हैं। आवाज बेहद सुरीली और कड़ाकेदार है। यश भारती सम्मान की खबर उन्हें बुधवार को मिली तो उल्टा सवाल पूछा कि यह क्या होता है? बताया गया कि 11 लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र मिलेगा। सीएम सम्मानित करेंगे। यह खुशखबरी सुनते ही श्री हुसैन की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। बोले- ऊपर वाले के घर देर है, अंधेर नहीं। उसने अपने सच्चे बंदे की सुन ली। हामिद हुसैन लगभग 40 लोगों को यह हुनर सिखा चुके हैं। परिवार में पत्नी के अलावा दो पुत्र और पांच पुत्रियां हैं।