बांदा। रेलवे के अवैध तरीके से ई-टिकट बनाने वाला आरोपी प्रतिबंधित ओसन साफ्टवेयर का इस्तेमाल करता था। यह साफ्टवेयर उसने मुंबई के एक व्यक्ति से खरीदा था। इसके एवज में उसे प्रतिमाह 1000 हजार रुपये गूगल पे से अदा करता है। इसके पहले वह रेयर मैंगो साफ्टवेयर व स्पार्क वी-2 का इस्तेमाल करता था, लेकिन यह ज्यादा हाईलाइट हो गया था जिसे बंद कर दिया।
क्राइम ब्रांच प्रभारी एसएन पाटीदार द्वारा रेल सुरक्षा आयुक्त को भेजी गई रिपोर्ट में बताया कि आरोपी काफी चालाक व्यक्ति है। प्रतिबंधित साफ्टवेयर को कोविड-19 में कम ट्रेनों के संचालन पर प्रति व्यक्ति 1000 से 1500 रुपये अधिक लेकर बड़े पैमाने पर 37 पर्सनल यूजर आइडियों पर टिकिट बनाकर बेचता था।
जो व्यक्ति उसकी दुकान पर टिकिट बनवाने आते थे तो उनके मोबाइल नंबर से नई पर्सनल यूजर आईडी बनाकर स्वयं उपयोग करता था। गौरतलब हो कि रेलवे की क्राइम ब्रांच ने सोमवार को कतरल रोड (नरैनी) में स्थित साइबर कैफे पर छापा मारकर आरोपी संदीप कुमार पुत्र शिवदयाल सोनी को गिरफतार किया था।