मेडिकल के लिए जिला अस्पताल लाए गए आरोपी।
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पंजाब आर्मरी डकैती कांड के आरोपियों से 48 घंटे पूछताछ के बाद कोतवाली पुलिस ने शनिवार को दोपहर उन्हें फिर वापस जेल भेज दिया। शातिर किस्म के आरोपियों ने पुलिस को बहुत कुछ खुलकर नहीं बताया। कुछ स्थानों के बारे में जानकारी दी, जहां घटना के पहले गए-आए। पुलिस ने आरोपियों का डेमो भी कराया।
तीन जुलाई को नासिक जेल से लाने के बाद अदालत के आदेश पर 12 जुलाई को शहर कोतवाली पुलिस ने सभी छह आरोपियों को बांदा जेल से रिमांड कस्टडी पर लिया था। कस्टडी की अवधि 48 घंटे निर्धारित थी। यह शनिवार को दोपहर खत्म हो गई। कोतवाली प्रभारी श्रीनिवास यादव सहित बड़ी संख्या में पुलिस इन सभी आरोपियों को लोहे की जंजीर से बंधी हथकड़ी डालकर जिला अस्पताल ले गई। वहां उनका डाक्टरी परीक्षण कराया। उसके बाद विशेष न्यायाधीश (डकैती) की अदालत में पेश किया।
वहां से सभी को जेल भेज दिया गया। दो दिन की रिमांड कस्टडी के दौरान आरोपियों से डकैती पूरा ताना-बाना उगलाने के लिए पुलिस ने भरसक कोशिश की। सख्ती भी बरती। पुलिस की पूछताछ का खास फोकस इसी पर रहा कि महाराष्ट्र से बांदा आकर गन हाउस लूटने में यहां बांदा के किन-किन लोगों की मदद ली या यहां किनसे उनके तार जुड़े हैं। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने कुछ खास खुलकर नहीं बताया। पुलिस डेमो के लिए उन्हें उन स्थानों पर ले गई, जहां वह घटना के दिन या उसके पहले आए-गए थे।
आरोपियों ने अपनी बोलेरो की नकली नंबर प्लेट शहर के छावनी मोहल्ले में बनवाई थी। पुलिस उन्हें छावनी लेकर पहुंची, लेकिन आरोपी दुकान की पहचान नहीं बता पाए। पुलिस उस मेडिकल स्टोर पर भी उन्हें लेकर गई जहां से नींद और थकान दूर करने के बड़ी संख्या में सीरप खरीदे थे। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान जो जानकारियां मिली हैं, अब उन पर जांच-पड़ताल की जाएगी। इसी के बाद अगली कार्रवाई होगी। इस मामले की तफ्तीश कर रहे कोतवाली प्रभारी श्रीनिवास यादव ने बताया कि रिमांड के दौरान जो भी तथ्य और सुबूत मिले हैं उनके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।