बांदा। ‘गोमाता’ से बेरुखी के रुझान सामने आए हैं। 20वीं पशु गणना के ताजा आंकड़े इसके गवाह हैं। सड़कों और खेतों पर इनके झुंड देखकर भले ही हाय-तौबा मचाई जा रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि गोवंश की संख्या लगातार घट रही है। पिछली 19वीं पशुगणना से अब तक जनपद में गोवंश में 31 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरफ पशु पालकों का प्रेम भैंस और बकरियों की तरफ बढ़ रहा है। इनकी संख्या में क्रमश: 30 व 33 फीसदी का इजाफा हुआ है।
पिछले करीब दो दशकों से किसान और पशु पालक घाटे का सौदा मानकर गोवंशों से मुंह मोड़ रहे हैं। अधिकांश ने गोवंश को अन्ना छोड़ दिया है। यह किसानों और सड़कों पर राहगीरों व वाहनों के लिए संकट और समस्या बन गए हैं। माना जाता है गोवंश में तमाम गुण हैं और ये सभी के लिए लाभदायक हैं लेकिन इसके बावजूद किसानों और पशु पालकों के घरों में गोवंश लगातार धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। पिछली 19वीं पशु गणना वर्ष 2012 में हुई थी। अब 20वीं पशु गणना छह माह पूर्व 2020 में हुई है। दोनों के तुलनात्मक आंकड़ों से यह खुलासा हुआ कि जनपद में गोवंश में एक तिहाई से ज्यादा कमी आई है। आठ वर्षों में 1.16 लाख से ज्यादा गोवंश कम हुए हैं। अलबत्ता भैंस और बकरी की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत पशु गणना से संबंधित सूचना संकलित करने वाले आरटीआई एक्टीविस्ट कुलदीप शुक्ला ने बुंदेलखंड में गोवंश की अनदेखी और घटते ग्राफ पर दुख जताया है। उधर, श्री शुक्ल को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.आईएन सिंह ने बताया कि 20 पशु गणना में जनपद में कुल 2,55,495 गोवंश हैं। भैंसों की संख्या 4,23,768 और बकरी 2,81,392 पाई गई हैं। भेड़ 9702 और सूकर 5409 हैं। यह भी बताया है कि वर्ष 2018-19 में 31,802 और वर्ष 2019-20 में 40,321 पशुओं का बधियाकरण किया गया है। जनपद में अब तक ग्रामीण स्तरीय पशुपालकों को अंशदान पर 124 सांड़ वितरित किए गए हैं।
पशु 19वीं पशु गणना 20वीं पशु गणना अंतर
गाय 3,71,509 2,55,495 1,16,014 घटे
भैंस 3,24,091 4,23,768 99,677 बढ़े
बकरी 2,10,916 2,81,392 70,476 बढ़ीं
भेड़ 12,259 9702 2557 घटे