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मंदिरों में दूर से ही होंगे देवी के दीदार

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देवी प्रतिमा को अंतिम रूप देता मूर्तिकार। - फोटो : BANDA
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बांदा। शारदीय नवरात्र की तैयारियां देवी मंदिरों में लगभग पूरी हो गईं हैं। रंग-रोगन के साथ रंग-बिरंगी आकर्षक बिजली सजावटों से मंदिरों को सजाया और संवारा गया। पूर्व संध्या पर शुक्रवार से ही देवी मंदिर जगमगा उठे।
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उधर, कोरोना गाइड लाइन प्रभावी होने से श्रद्धालुओं को देवी दर्शन के लिए कई प्रतिबंधों से गुजरना होगा। मास्क लगाकर ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा। मूर्ति को स्पर्श नहीं किया जा सकेगा। दूर से ही देवी के दीदार और दर्शन करना होंगे।
शहर के प्रमुख मंदिरों महेश्वरी देवी, काली देवी, सिंहवाहिनी, मरही माता, चौसठ जोगिनी सहित खत्री पहाड़ की विंध्यवासिनी, बबेरू की मढ़ी दाई, तिंदवारी की कालका देवी आदि नवरात्र में श्रद्धा और पूजा का मुख्य केंद्र रहेंगे।
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मंदिर प्रबंध समितियों ने मौजूदा प्रतिबंधों के मद्देनजर श्रद्धालुओं को दर्शन और पूजा आदि के विशेष इंतजाम किए हैं। महेश्वरी देवी मंदिर पुजारी दप्पू सैनी और ट्रस्ट के शैलेंद्र सिंह बुंदेला तथा काली देवी मंदिर पुजारी तुलसीराम पुष्पक ने बताया कि बगैर मास्क लगाए मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। मूर्तियों के दर्शन 4 से 6 फिट दूर से ही करने होंगे। उन्हें स्पर्श नहीं किया जा सकेगा।
आज घोड़े पर आएंगी मां दुर्गा
बांदा। ज्योतिषाचार्य पंडित हर्षित महाराज ने बताया कि नवरात्र का पहले दिन शनिवार होने से देवी दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी, जबकि उनका मूल वाहन सिंह (शेर) है। अंतिम दिन रविवार होने से देवी का प्रस्थान भैंसें पर होगा। बताया कि इस बार सर्वार्थसिद्धि योग में नवरात्र शुरू हो रहा है।
पहले दिन घट स्थापना शुभ मुहूर्त में होगी। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद शुभ माना जाता है। 24 अक्तूबर को सूर्योदय के वक्त अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि रहेगी। इसलिए इस दिन अष्टमी और नवमी साथ होगी। अगले दिन शाम के समय यानी विजय मुहूर्त में दशमी तिथि होने से 25 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा।
शहर में 100 देवी प्रतिमाओं की स्थापना
बांदा। कोविड-19 के प्रतिबंधों ने बांदा शहर में प्रतिमाओं की संख्या में 50 फीसदी से ज्यादा कमी ला दी है। पूर्व वर्षों में लगभग 250 देवी प्रतिमाओं की स्थापना होती रही है। इस वर्ष मात्र एक सैकड़ा ही पंडाल सज सकेंगे।
केंद्रीय पूजा नवदुर्गा महोत्सव समिति अध्यक्ष अमित सेठ भोलू ने बताया कि चौराहों में मूर्ति नहीं रखी जाएंगी। सड़कों पर सजावट और पंडालों में भीड़ नहीं होगी।
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