बांदा। ‘मिलहि न रघुपति बिनु अनुरागा’। भगवान बिना
अनुराग के नहीं मिलते। अनुराग सिर्फ ईश्वर में मन रमाने से पैदा होता है।
ये बातें कथा वाचक पंडित लालमणि शास्त्री (जयपुर, राजस्थान) ने जहीर क्लब
में संगीतमयी श्रीराम कथा में चौथे दिन कहीं।
मृत्युंजय मानस मंडल
संकट मोचन मंदिर की ओर से आयोजित कथा में सोमवार को कथा वाचक ने भक्त और
भगवान के प्रेम की कथा सुनाई। कहा कि संसार से मन हट जाए उसे विराग कहते
हैं।
संसार में मन लग जाए तो राग कहते हैं। भगवान में यदि मन रम
जाए तो उसे अनुराग कहते हैं। ‘रामहि केवल प्रेम पियारा’ भगवान तो प्रेम से
प्राप्त होते हैं। प्रेम तो यहीं प्राप्त होता है, जहां आप बैठे हैं यानी
सत्संग में।
पार्वती की पूजा करने गईं सीता से किसी ने उनसे पूछा
किस विधि से पूजा की? सीता ने कहा मैंने पूजा विधि से नहीं बल्कि अनुराग से
की है। क्योंकि भगवान को तो केवल प्रेम ही प्रिय है।