दहेज की खातिर प्रताड़ित की जा रही युवती के बेटी क्या पैदा हो गई, उस पर और जुल्म ढाए जाने लगे। पिता किसी तरह उसे बचाकर लाया। पुलिस से गुहार लगाई। सुनवाई न होने पर उसने सोमवार को अपने गांव में ही पत्नी, दो बच्चों के साथ आमरण अनशन शुरू कर दिया। अनशन पर प्रताड़ित की गई उसकी बेटी भी अपनी एक माह की बच्ची के साथ बैठी है। उसका आरोप है ससुरालवालों ने हैवानियत की हदें पार कर दी हैं। मारने-पीटने के अलावा कम खाना देते थे। पानी मांगने पर जबरन अपनी पेशाब पिलाते थे।
युवती का मायका गिरवां थाना क्षेत्र में, ससुराल बिसंडा थाना क्षेत्र में है। बिसंडा थानाध्यक्ष रामपाल सिंह यादव का कहना है कि शिकायती पत्र मिला है। उन्होंने दोनों पक्षों को 13 सितंबर को पुलिस लाइन स्थित परामर्श केंद्र बुलाया है। यहां समझौता न हुआ तो पीड़ित पक्ष की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
गिरवां थाने के एसओ घनश्याम पांडेय का भी गजब का जवाब रहा कि पहले इस बात की जांच करेंगे कि अनशन की सूचना थाने में पहले से दी गई है या नहीं। गिरवां थाने के बड़ोखर बुजुर्ग गांव का जगरूप कपरिया अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गांव की ही एक कुटी में अनशन पर बैठा है।
उसने बताया कि पुत्री रामा की शादी तीन साल पहले बिसंडा कस्बे में मनीष पुत्र संतोष के साथ की थी। और दहेज के लिए उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। इस बीच बेटी पैदा हो गई तो ससुराल वालों ने उस पर जुल्म की इंतिहा कर दी। पति, ससुर और जेठ उसके साथ मारपीट करते थे।
सास और ननद जबरन अपनी पेशाब पिला रही थीं। उसे जिंदा फूंकने की कोशिश की गई तो पड़ोसियों ने बचा लिया। जानकारी होने पर वह 14 अगस्त को बिसंडा पुलिस के साथ गया और किसी तरह अपनी बेटी को ससुरालियों के चंगुल से निकाल कर लाया। उसने बिसंडा थाने में तहरीर दी, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन अनशन पर बैठना पड़ा। सुनवाई न होने पर मुख्यालय में आमरण अनशन करेगा।