बांदा। अरबी उर्दू मदरसों के बच्चों में भी मेधा मौजूद है। इसकी बानगी सोमवार को रात शहर के छिपटहरी (कलामतपुरा) में स्थित मदरसा इस्लामिया फैजे सिद्दीक के सालाना जलसे में नजर आई। यहां तालीम हासिल कर रहे बालिक-बालिकाओं से शानदार कार्यक्रम पेश किए। मदरसे में बालक और बालिकाएं एक साथ दीनी तालीम हासिल कर रही हैं।
जलसे की शुरूआत बच्चों ने नात से की। बालक-बालिकाओं ने कई मुद्दों पर भाषण दिए। खासकर दहेज को लानत बताते हुए इस पर एक ड्रामा भी पेश किया। देश की जंगे आजादी पर भी नाटक पेश किया। इसे जमकर सराहा गया। पांचवीं कक्षा तक चल रहे मदरसे में विभिन्न कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय मुकाम पाने वाले बच्चों को ईनाम दिए गए। 92 फीसदी अंक हासिल करने वाले छात्र मोहम्मद अरसलान को मदरसा टॉपर का ईनाम मिला। छात्र मोहम्मद हुजैफा ने उर्दू इमला में पहला ईनाम पाया।
इनके अलावा मोहम्मद समीर, नूऐमा खातून, हफशा, अलशिफा, आफरीन, नाजिया, साद, जैनब, अशहर, अबू तलहा, शोएब, बुशरा आदि बच्चों को पूरे साल सबसे ज्यादा हाजिरी देने पर ईनाम दिए गए। इस अवसर पर मुफ्ती उबैदुल्ला (मदरसा हथौरा) ने तालीम पर जोर दिया। हाजी महफूजुर्रहमान, हाजी मतीन, मोहम्मद सिराजुद्दीन, नसीम आदि शामिल रहे।