बांदा। बड़े भाग मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सुर
ग्रंथन गावा। रामचरित मानस ऐसा शास्त्र है, जिसके माध्यम से मनुष्य का
चरित्र ऊंचा होता है। ये बातें मंडलायुक्त वेकेंटेश्वर लू ने रेलवे स्टेशन
परिसर में शनिवार को मानस सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर कही।
उन्होंने
कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि रामचरित मानस से मोक्ष का द्वार
खुलता है। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी अपना चरित्र निर्माण करे।
मंडलायुक्त
ने परहित सरस धर्म नहिं भाई चौपाई की भी व्याख्या की। जबलपुर से आईं मानस
वक्ता उमा शर्मा ने मां सती की कथा मेें कहा कि मां सती ने भगवान राम की
परीक्षा लेने की सोची। उन्होंने सीता का वेष धारण किया।
लेकिन राम
ने उन्हें पहचान लिया और प्रणाम किया। इंदु रामायणी (सागर) ने राम की महिमा
का बखान किया। मऊरानीपुर से आए राजेंद्र पाठक ने राजा दक्ष प्रजापति का
वृतांत सुनाया। रामदेव महाराज (सुल्तानपुर) व संत मोहनदास महाराज
(चित्रकूट) ने मानस का महत्व बताया।