बांदा। खदान और खनिज के खेल में मंत्री पद गंवाने वाले गायत्री प्रसाद प्रजापति दूसरे मंत्री हैं। इसके पहले बसपा सरकार में बाबू सिंह कुशवाहा को सरकार से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। उधर, बुंदेलखंड समेत पूरे प्रदेश में अंधाधुंध अवैध खनन की चौतरफा शिकायतों के बावजूद गायत्री प्रजापति के बारे में चुप्पी साधे रहे मुख्यमंत्री को अब हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही सीबीआई की जांच में शायद कोई खतरा नजर आने लगा है।
इसी कारण गायत्री प्रजापति को बर्खास्त करने पर मजबूर हो गए। बुंदेलखंड में सिंडीकेट और बालू खनन से जुड़े कई बालू कारोबारी गायत्री प्रजापति के चहेतों में हैं। आका की बर्खास्तगी से उन्हें झटका लगा है।
बालू कारोबार पर बदनामी का लबादा सरकार में तब चढ़ा जब बांदा जिले के बाशिंदे बाबू सिंह कुशवाहा खनिज मंत्री थे। उनके कार्यकाल में पूरे बुंदेलखंड में बालू कारोबार परवान पर चढ़ गया। बालू ‘लाल सोना’ बन गई। न सिर्फ बांदा बल्कि प्रदेश के अन्य बालू माफिया की निगाहें भी बुंदेलखंड में गड़ गईं। बसपा सरकार में ही खदान खनन के साथ सिंडीकेट का भी धंधा शुरू हुआ जो अभी भी चल रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा को न सिर्फ मंत्रिमंडल से हटाया बल्कि एनएचआरएम घोटाले में नाम आने पर पार्टी से बाहर कर दिया।
सपा सरकार बालू कारोबार में बसपा से भी दो कदम आगे निकली। पहले से कहीं ज्यादा अवैध खनन का खुला खेल होने लगा। सिंडीकेट भी बरकरार रहा। अवैध खनन की मीडिया में आए दिन सचित्र खबरों और गाहेबगाहे विभिन्न संगठनों के इस मुद्दे पर आंदोलनों के बावजूद प्रदेश के खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति आंख मूंदे रहे। बुंदेलखंड आने पर मीडिया द्वारा अवैध खनन का सवाल किए जाने पर खिसिया कर कहा था कि कहीं कोई अवैध खनन नहीं हो रहा। सब खदानें वैध हैं।
अब अचानक मुख्यमंत्री द्वारा खनन मंत्री को बर्खास्त किए जाने से राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्मा गया है। इसके पीछे ज्यादातर लोग हाईकोर्ट द्वारा कराई जा रही सीबीआई जांच मान रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच रोकने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी देकर तमाम कोशिश की लेकिन शुक्रवार को हाईकोर्ट ने सरकार की यह अर्जी खारिज कर सीबीआई जांच पूरी होने के आदेश दिए। उसी दिन सीबीआई ने अपनी जांच की पहली रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की। हाईकोर्ट ने सीबीआई को छह हफ्ते में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। कयास लगाया जा रहा कि इस जांच रिपोर्ट में सीबीआई ने कुछ ऐसा जरूर शामिल किया है, जिसमें गायत्री प्रसाद प्रजापति पर भी फंदा कस रहा हो। जाहिर है मंत्री फंसेगा तो सरकार और मुख्यमंत्री की फजीहत होगी। चुनाव के चंद महीने पहले यह किरकिरी सपा के लिए घातक हो सकती है। शायद मुख्यमंत्री ने इसी ‘डैमेज कंट्रोल’ के लिए यह कदम उठाया है।
गायत्री के नजदीकियों में हड़कंप
बांदा। बुंदेलखंड और खासकर बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा और उरई में खनिज का बड़ा कारोबार है। यहां गायत्री प्रजापति से सीधे संपर्क रखने वाले कई बालू कारोबारी हैं। प्रजापति की बर्खास्तगी से उनमें हड़कंप हैं।
सबसे बड़ा खौफ सीबीआई का है। सीबीआई के जाल में मंत्री से लेकर संतरी तक फंस सकते हैं। यह भी चर्चा है कि सीबीआई जांच शुरू होने के बाद कई बालू कारोबारियों ने तत्काल पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। शायद भाजपाई हो जाने पर सीबीआई से कुछ राहत मिलेगी। सीबीआई केंद्र सरकार की है और केंद्र में भाजपा की सरकार है।