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गैंगेस्टर एक्ट के आरोपी बरी, एसओ पर कार्रवाई के आदेश

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बांदा। गैंगेस्टर एक्ट के मामले में पुलिस की लचर पैरवी और प्रक्रिया के चलते साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया। साथ ही प्रदेश के गृह सचिव और डीआईजी को तत्कालीन कालिंजर थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करते हुए दंडित करने का आदेश दिया। अदालत ने एक माह में इस कार्रवाई से अवगत कराने को कहा।
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अप्रैल 2014 में तत्कालीन थानाध्यक्ष रमेश सिंह ने करतल गांव के सुरेश कहार पुत्र कहरू उर्फ रामआसरे को गिरोह बंद अपराधी दिखाते हुए उसके गैंग में देवीदीन विश्वकर्मा पुत्र लुक्कू विश्वकर्मा निवासी रामनेड़ (अजयगढ़, पन्ना), मोहम्मद अली पुत्र बाबू (लक्ष्मी बाजार नरैनी) और गंभीर सिंह पुत्र कल्लू सिंह (बिलहरका, नरैनी) को गिरोह का सक्रिय सदस्य बताया था।
पुलिस पार्टी पर फायरिंग आदि की कई केस हिस्ट्री दर्शाई थी। तत्कालीन डीएम से गैंगेस्टर एक्ट का अनुमोदन लेकर उक्त चारों के विरुद्ध गैंगेस्टर एक्ट में निरुद्ध किया था। बाद में सुरेश कहार और देवीदीन विश्वकर्मा के विरुद्ध ही पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया।
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विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर एक्ट/पंचम अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद रिजवान अहमद ने गुरुवार को इस मामले में अपने 14 पृष्ठीय फैसले में अभियुक्त गंभीर सिंह को उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप (निवारण अधिनियम गैंगेस्टर एक्ट) से दोष मुक्त (बरी) कर दिया।
दूसरे सह अभियुक्त सुरेश कहार के अदालत में हाजिर न होने पर उसकी पत्रावली वर्ष 2016 में ही अलग कर दी गई थी। उसका निस्तारण करके पत्रावली दाखिल दफ्तर की जा चुकी है। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त सुरेश कहार की पत्रावली अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखी जाए।
उधर, न्यायाधीश श्री अहमद ने आरोप पत्र दाखिल करने से पहले सक्षम अधिकारी की अभियोजन स्वीकृति न लेने और न्यायालय में गलत बयानी करने, कर्तव्य पालन में उपेक्षा और घोर लापरवाही आदि पर तत्कालीन कालिंजर थानाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और एक माह के अंदर दंडित किए जाने के लिए गृह सचिव, डीजीपी व डीआईजी को आदेश दिए हैं।
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