शासनादेश को ठेंगा बताकर छात्रवृत्ति के लिए डीआईओएस और समाज कल्याण कार्यालय से टरकाई जा रहीं स्नातक छात्राएं बेहद गुस्से में हैं। सोमवार को उन्होंने ज्ञापन देकर विरोध जताया।
सोमवार को राजकीय महिला डिग्री कालेज की बीए और एमए की संस्थागत छात्राओं के जत्थे ने डीएम को संबोधित शिकायती पत्र सिटी मजिस्ट्रेट को दिया। इसमें कहा गया कि छात्रवृत्ति के लिए उन्होंने औपचारिकताएं पूरी करके आवेदन जमा करा दिया।
लेकिन जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मेें बेवजह अड़ंगे लगाकर छात्राओं के आए प्रमाण पत्र को अवैध बताया जा रहा है। जबकि प्रशासन द्वारा जारी यह प्रमाण पत्र तीन वर्ष के लिए वैध है। छात्राओं ने ज्ञापन के साथ इस बाबत पूर्व में जारी हुए शासनादेश की फोटो प्रति भी संलग्न की है।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। छात्रवृत्ति उनके खाते में नहीं भेजी जा रही है। ऐसे में उनकी पढ़ाई बंद हो सकती है।
सिटी मजिस्ट्रेट केएस पांडेय ने जिला समाज कल्याण अधिकारी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है कि शासनादेश के अनुसार आय प्रमाण पत्र तीन वर्ष तक वैध हैं तो छात्राओं के आदेवन में क्यों और कहां कठिनाई आ रही है? ज्ञापन देने वाली छात्राओं में एमए की जया सिंह, प्रीति वर्मा, मधु देवी, आराधना, वंदना, सीता साहू, प्रीता दीक्षित, वैशाली साहू, वर्तिका वर्मा और बीए की प्रिया सिंह, अंजना साहू, रीतू सेन आदि हैं।