आंगनबाड़ी केंद्र मेें दुग्ध मुंहे बच्चों को अन्न प्राशन करातीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां।
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बांदा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और 6 माह के शिशु के अन्न प्राशन की शनिवार को शुरूआत हो गई। इस योजना पर करीब 9 लाख रुपये खर्च हुए। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र को 500 रुपये दिए गए थे।
कार्यकत्रियों ने गर्भवती महिलाओं को लाई-चना, मौसमी फल, एक नारियल व सुहाग का सामान भेंट किया। केंद्रों पर गाने-बजाने भी हुए। कई केंद्रों में सिर्फ औपचारिकताएं हुईं। सीडीओ व जिला कार्यक्रम अधिकारियों ने केंद्रों में कार्यक्रम का निरीक्षण किया।
स्निप (आईसीडीएस तंत्र सुदृढ़ीकरण एवं पोषण सुधार परियोजना) के तहत समुदाय आधारित परंपरागत कार्यक्रम गोद भराई और अन्न प्राशन की रस्में शनिवार को जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुईं। कई में ताले बंद रहे। योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने सात माह की गर्भवती के माथे पर बिंदी और टीका लगाकर मातृत्व का सम्मान किया।
आयरन की गोलियां व सुहाग की सामग्री का तोहफा दिया। उन्हें कुपोषण दूर करने के लिए इन चीजों को दैनिक आहार में शामिल करने को प्रेरित किया। गोद भराई के समय प्रसव के पहले होने वाली तीन जांचों के बारे में बताया।
छह माह उम्र वाले बच्चों के अन्न प्राशन की रस्म भी अदा की गई। इस मौके पर गाना-बजाना भी हुआ। बच्चों को खीर बनाकर खिलाई गई। इसमें प्रधान व गांव के अन्य संपन्न लोगों ने भी सहयोग किया। सीडीओ रामकुमार सिंह अपने गोद लिए गांव डिंगवाही में इस अवसर पर मौजूद रहे। जिला कार्यक्रम अधिकारी आरडी यादव और सीडीपीओ अर्जुन सिंह ने काशीराम कालोनी हरदौली में आंगनबाड़ी केंद्रों में रस्मों में उत्साह बढ़ाया।