फोटो- 14 गिरवां थाना क्षेत्र के देवीजी गिरवां रोड पर मालिन बगीचा के पास होता है मौरंग का डंप। स
बांदा। बांदा-चित्रकूट में ट्रक इंट्री के नाम पर मौरंग कारोबारियों और खाकी का गठजोड़ सामने आने के इस पहलू के दूसरी तरफ खनिज विभाग की संलिप्तता से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। बारिश के मौसम में बंद हुईं तो खदानों में मौरंग कारोबारी अपने कारोबार को जारी रखने के लिए डंप का खेल शुरू कर देते हैं। हालांकि इसका परमिट भी खनिज विभाग जारी करता है लेकिन परमिट से कई गुना ज्यादा मात्रा में मौरंग डंप कर ओवरलोडिंग का खेल शुरू होता है।
इस खेल को कामयाब बनाने के लिए पुलिस का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। इसलिए ज्यादातर कारोबारी अपने इस धंधे को जारी करने के लिए अपने कारखासों के जरिए थानों में पैठ बनाते हैं। यही कारखास खाकी की बोली तय करके बेखौफ होकर अपने काम को अंजाम देते हैं।
जिले के थानों में मौरंग कारोबारियों ने अपने कारखास बना रखे हैं। यह कारखास पल-पल की खबर खदान संचालकों को पहुंचाते हैं। रुपये के आदान-प्रदान से लेकर जिले की संयुक्त छापामार टीम पर भी उनकी पूरी नजर रहती है। बातों-बातों में यह कारखास अंदर की बात पुलिसकर्मियों से उगलवाकर खुद भी सतर्क हो जाते हैं और अपने आकाओं को भी सतर्क कर देते हैं। इन कारखासों की पकड़ खनिज विभाग में भी अच्छी खासी होती है।
मिठाई के डिब्बे में नोटों की गड्डियों को पहुंचाने का काम इनसे लिया जाता है। जिले की बात करें तो वर्तमान में जिले में 32 डंप संचालित किए गए थे। इनका लाइसेंस भी खनिज विभाग ने जारी किया था। एक हजार घन मीटर मौरंग डंप करने का लाइसेंस जारी होने पर मौरंग कारोबारी दो से तीन गुना तक मौरंग का डंप करते हैं। इन डंप की आज तक जांच नहीं हो सकी। डंप की आड़ में ओवरलोडिंग का खेल खूब फल फूल रहा है। कई स्थानों पर मौरंग डंप की जगह अब सफाचट मैदान है।
कभी इन जगहों पर मौरंग के बड़े-बड़े चट्टे लगे देखे जा सकते थे। उधर, पुलिस विभाग में बदौसा थानाध्यक्ष व सिपाही के निलंबित होने से अब थानों के इंचार्ज भी ऐसे कारखासों को थाने की चौखट लांघना भी पसंद नहीं कर रहे हैं।
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दो दिन से मैं छुट्टी पर हूं। जो भी जानकारी चाहिए वह सोमवार को दे पाएंगे।
राज रंजन, जिला खनिज अधिकारी, बांदा।