मीडिया से बात करते कांग्रेस प्रदेश महासचिव भानु सहाय।
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बांदा। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव व बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड को दी गई 500 मेगावाट मुफ्त बिजली का प्रदेश की बसपा और सपा सरकारों ने बुंदेलखंड के उपभोक्ताओें से 20 हजार करोड़ रुपये वसूल लिए। सपा सरकार में बुंदेलखंड की बिजली इटावा और मैनपुरी को दे दी। कांग्रेस उपभोक्ताओं को यह पैसा वापस दिलाने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक का दरवाजा खटखटाएगी। यहां सुनाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट जाएगी। इसके लिए हर उपभोक्ता से उसके घर पर जाकर आवेदन पत्र भराया जाएगा। प्रदेश महासचिव शनिवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र में कांग्रेस सरकार ने केंद्रीय उत्पादन प्रणाली (सीजीएस) के अनावंटित कोटे से यूपी और एमपी के बुंदेलखंड को 500 मेगावाट बिजली मुफ्त दी थी।
इसमें 300 यूपी और 200 मेगावाट एमपी के बुंदेलखंड को दी गई थी लेकिन यूपी की बसपा और सपा तथा एमपी की भाजपा सरकारों ने साढ़े छह वर्षों में मुफ्त मिली इस बिजली से उपभोक्ताओं से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये वसूल लिए। बताया कि चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों के उपभोक्ताओं से 5897 करोड़ रुपये वसूले गए। यहां कुल 313173 बिजली उपभोक्ता हैं। यानी प्रति यूनिट सात रुपये वसूला गया। प्रत्येक उपभोक्ता की जेब में 1,88,292 रुपये का बोझ पड़ा। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अगले महीने से इस मुद्दे पर कांग्रेस की टीम बुंदेलखंड आ रही है। मुफ्त बिजली का वसूला गया पैसा वापस करने के लिए हरेक उपभोक्ता के घर-घर जाकर आवेदन पत्र भराया जाएगा। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल से कार्रवाई का अनुरोध किया जाएगा। यहां पर सुनवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। हर हाल में बुंदेलखंड के उपभोक्ताओं का पैसा वापस दिलाएंगे। पत्रकार वार्ता में प्रदेश महासचिव के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष विजय प्रकाश, महासचिव सुधाकर तिवारी, संगठन सचिव रघुनाथ द्विवेदी, राजेंद्र शर्मा, वरुण अग्रवाल (झांसी) सहित बांदा जिलाध्यक्ष अखिलेश शुक्ल, पूर्व विधायक रामेश्वर प्रसाद, जिला उपाध्यक्ष एमयू दुर्रानी, प्रवक्ता प्रद्युम्न दुबे लालू आदि भी थे।
राहुल को बुंदेलखंड से खास लगाव
बांदा। कांग्रेस प्रदेश महासचिव भानु सहाय ने कहा कि बुंदेलखंड के बारे में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी लगातार चिंतित और गंभीर हैं। वह पांच बार बुंदेलखंड आ चुके हैं। जल्द ही पुन: कार्यक्रम बन सकता है। राहुल गांधी ने ही बुंदेलखंड की बदहाली और किसानों की बर्बादी नजदीक से देखी और महसूस की है। महासचिव ने कहा कि राहुल गांधी आगमन का ही दबाव था कि केंद्र सरकार ने उनके भ्रमण के बाद यहां सूखा राहत अध्ययन दल भेजा। किसानों की कुछ मदद की। वर्ष 2008 में बुंदेलखंड का भ्रमण करने के बाद केंद्र सरकार से बुंदेलखंड के 7466 करोड़ रुपये का सूखा राहत पैकेज दिलवाया। महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा, बसपा, सपा की राज्य सरकारों ने बुंदेलखंड के साथ धोखाधड़ी की।