रात के अंधेरे में खदान से बालू भरने गए चार ट्रैक्टर मालिकों को किसी गिरोह ने दबोच लिया। बदमाशों ने चालकों व मजदूरों को पीटने के बाद चारों ट्रैक्टर मालिकों के हाथ और आंखों पर पट्टी बांधी और जंगल की तरफ ले गए। ट्रैक्टर चालकों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने रात में ही नाकाबंदी कर कांबिंग शुरू कर दी।
इसके बाद बदमाशों ने तड़के चारों को मुक्त कर दिया। चर्चा है कि फिरौती लेकर पकड़ छोड़ी गई है। जबकि पुलिस इसे कांबिंग का दबाव बता रही है। पुलिस चारों ट्रैक्टर मालिकों को लेकर जंगल में बदमाशों की तलाश कर रही है। यह सनसनीखेज वारदात थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गांव की है।
मंगलवार की रात गांव के चार लोग रामजस पटेल पुत्र द्वारिका, राजे पुत्र छोटा पटेल, हीरा पुत्र नत्थू पटेल और छोटा पुत्र जगदेव यादव अपने निजी ट्रैक्टरों पर बालू भरने बागै नदी के पथरा घाट गए थे। रात करीब 10 बजे जंगल के बीच ढुढौहा नाला (महुई) में पुलिया के पास बदमाशों ने ट्रैक्टरों को टार्च की रोशनी दिखाकर रुकवा लिया।
उन्होंने चालकों से पूछा कि ट्रैक्टर का मालिक कौन है। ट्रैक्टर मालिकों की पहचान करने के बाद बदमाशों ने उनके हाथ साफी से बांध दिए और जंगल की तरफ ले चले। चालक और मजदूरों को पीटने के बाद यह कहकर घर भेज दिया कि 20 लाख रुपये मिलने के बाद ही चारों पकड़ छोड़ी जाएंगी।
चालक से सूचना पाकर अपहृत ट्रैक्टर मालिक रामजस के पुत्र सुरेश ने फतेहगंज थाने और कंट्रोल रूम को फोन से वारदात की जानकारी दी। अतर्रा क्षेत्राधिकारी राजेश सिंह के साथ बदौसा थानाध्यक्ष राजीव यादव, फतेहगंज थानाध्यक्ष पीपी शुक्ला, अतर्रा थानाध्यक्ष घनश्याम पांडेय फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
पकड़ की सूचना पाते ही जंगल में कांबिंग शुरू कर दी। पुलिस ने जगह-जगह नाकाबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। तड़के तक पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली। इस बीच सुबह करीब छह बजे बदमाशों ने चारों ट्रैक्टर मालिक ों को नौगवां गांव के टिकरीपुरवा के पास छोड़ दिया। ट्रैक्टर मालिक किसी तरह से बल्देव पुरवा (महुआ) तक आए और घर फोन करके ट्रैक्टर मंगाया। ट्रैक्टर से वापस गांव पहुंचे।
फतेहगंज थाना पुलिस ने चारों अपहृतों को अपने साथ लिया और उनकी निशानदेही पर एक बार फिर जंगल में कांबिंग शुरूकर दी। फतेहगंज थानाध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल अपहृतों को लेकर बदमाशों की तलाश की जा रही है। अभी कोई तहरीर न मिलने से रिपोर्ट नहीं लिखी गई है।
क्षेत्र में चर्चा है कि कुछ बड़े गिरोहों से निकाले गए छुटभैय्या बदमाशों ने गैंग बना लिया है। इसमें कुछ आदिवासी भी शामिल हैं। यह करतूत उन्हीं की है। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ रकम फिरौती के रूप में देकर पकड़ मुक्त कराई गई है। हालांकि पुलिस पकड़ छूटने के पीछे अपना दबाव बता रही है।