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हड़ताल के दौरान चल बसे चार मरीज

Tue, 20 Sep 2016 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे अस्पतालकर्मी। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। फार्मासिस्टों समेत अस्पतालकर्मियों की हड़ताल पहले ही दिन जानलेवा साबित हुई। तीमारदारों का आरोप है कि इलाज के अभाव में एक महिला समेत चार मरीजों की मौत हो गई है। हड़ताली अस्पतालकर्मी परिसर में ही धरना देकर मांगों के नारे लगाते रहे। सहम कर तमाम मरीज अस्पताल छोड़ गए। दो सैकड़ा से ज्यादा मरीजों को डाक्टरों ने मेडिकल कालेज रेफर या डिस्चार्ज कर दिया। हड़ताल से निपटने के लिए प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका है।
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प्रदेशव्यापी आह्वान में मंगलवार को सभी सरकारी अस्पतालों में डिप्लोमा फार्मासिस्ट व नर्स, स्थाई कर्मी पूर्व घोषणा के मुताबिक बेमियादी हड़ताल पर चले गए। मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल से लेकर जनपद के कई दर्जन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। गंभीर मरीजों की जान पर बन आई। उन्हें दवाएं नहीं मिलीं। जिला अस्पताल में ऐसे ही मामले में दवा न मिलने पर 60 वर्षीय चंद्रकली पत्नी जुग्गीलाल (चिल्ली) की मौत हो गई। उसे बुखार और पीलिया था। मृतका के पुत्र राजकरन कुशवाहा ने जिलाधिकारी से शिकायत की कि डाक्टरों की लापरवाही से उसकी मां की जान गई। दोषी डाक्टर के वेतन से मुआवजा देने की मांग की। दूसरी मौत बड़ा गांव के 37 वर्षीय सुरेश पुत्र गोरेलाल की हुई। उसे सोमवार की रात ट्रामा सेंटर लाया गया था। हड़ताल में दवाएं न मिलने से इलाज नहीं हो सका। कुछ ही देर बाद वह चल बसा। हड़ताल ने तीसरी जान शहर के मर्दन नाका निवासी मोहम्मद इब्राहीम (70) पुत्र मौला बक्श की ली। खून की कमी और बुखार पीड़ित इस मरीज को मंगलवार को सुबह अस्पताल लाया गया था। इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। नौहाई (नरैनी) गांव का रामदीन (75) पुत्र शिवपरसन को मंगलवार को जिला अस्पताल लाया गया था। उसकी भी मौत हो गई।

उधर, मौतों के सवाल पर मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. किशोरी लाल का कहना था कि इनमें कई मरीज काफी सीरियस थे। इन्हें पहले ही रेफर किया जा चुका था। दूसरी तरफ मरीजों के ज्यादातर तीमारदारों ने आरोप लगाया कि जबरन डाक्टरों ने डिस्चार्ज या रेफर किया। अस्पताल के वार्ड सूने हो गए। कई मरीज मेडिकल कालेज रेफर कर दिए गए। गरीब मरीज अस्पताल के बरामदों में ही तड़पते रहे। स्वाइन फ्लू, चिल्ड्रेन वार्ड, इमर्जेंसी वार्ड, महिला वार्ड, डेंगू वार्ड, बर्न वार्ड, पुरुष वार्ड आदि खाली हो गए।
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नोटिस के बाद भी नहीं दीं दवा स्टोर की चाबी
बांदा। हड़ताल पर गए फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स आदि ने अस्पताल के दवा स्टोर इत्यादि की चाबियां अपने कब्जे में रखीं। नतीजे में ड्यूटी कर रहे डाक्टर या अन्य कर्मी मरीजों को दवाएं नहीं दे पाए। न ही इनकी जांच हो सकी। इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. किशोरीलाल का कहना था कि हड़ताल कर्मचारियों को नोटिस दी गई थी कि वह चाबियां वापस कर दें। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वार्डों में दवा स्टोर न खुलने से मरीजों को दवाएं नहीं मिल पाईं। सीएमएस ने बताया कि इस बारे में डीएम और सीएमओ को अवगत करा दिया गया है। संविदा और टीएनएम संस्था कर्मियों से काम चलाया जा रहा है। कुछ जरूरी दवाएं पहले ही इमर्जेंसी स्टाक में रखा दी गई हैं।


मेडिकल कालेज में मरीज बढे़
बांदा। हड़ताल से जिला अस्पताल सूना हुआ तो मेडिकल कालेज में सन्नाटा टूट गया। पहले ही दिन मेडिकल कालेज में रोजमर्रा से डेढ़ गुना करीब 873 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ। यहां आईपीडी में भी दोगुना मरीज हो गए। आम दिनों में 30 के अंदर मरीज रहते हैं। मंगलवार को 89 हो गए। मेडिकल कालेज में कोई भी कर्मचारी हड़ताल पर नहीं हैं। यहां पर संविदा और ठेके पर हैं। प्रधानाचार्य डा. सुनील कुमार आर्य ने बताया कि 300 बेड का अस्पताल पूरी तरह चालू है। जिला अस्पताल से आने वाले मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं और स्टाफ है। अलबत्ता आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी (ईएमओ) न होने से घटना में घायल इत्यादि गंभीर मरीजों का सिर्फ प्राथमिक उपचार करके रेफर किया जाएगा।
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