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डायलिसिस की चार मशीनें बांदा से चली गईं बरेली, ये हैं कारण

Mon, 04 Feb 2019 11:34 PM IST
ASIF ASIF अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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जिला अस्पताल में बंद पड़ी डायलिसिस यूनिट। - फोटो : अमर उजाला
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पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत जिला अस्पताल में खुली हीमोडायलिसिस यूनिट में बिजली आड़े आ गई है। नतीजतन लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हुई मंडल मुख्यालय की इस यूनिट का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस अव्यवस्था के चलते शासन ने यूनिट की चार मशीनें बरेली भेज दी हैं। 

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प्रदेश सरकार ने हेरिटेज लिमिटेड, वाराणसी के सहयोग से यहां डायलिसिस यूनिट की स्थापना की है। पिछले माह 19 जनवरी को इसका उद्घाटन होना था, लेकिन बिजली आपूर्ति आड़े आ गई। पीछे बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल परिसर में लगे 250 केवीए ट्रांसफार्मर से कनेक्शन होना था, लेकिन ट्रांसफार्मर पर ओवरलोड पड़ने के मद्देनजर यूनिट को आपूर्ति नहीं की जा रही। यूनिट में किडनी के मरीजों का डायलिसिस किया जाएगा। अभी इसके लिए यहां के मरीजों को महानगरों में जाना पड़ता है। 

यूनिट प्रभारी प्रदीप शुक्ला ने बताया कि ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा बिजली विभाग को पत्र भेजा गया है। उधर, बिजली विभाग के उपखंड अधिकारी हिमांशु कुमार ने बताया कि विभाग के पास अधिक क्षमता वाला दूसरा ट्रांसफार्मर फिलहाल नहीं है। एसडीओ का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को यह भी सुझाव दिया गया है कि वह ट्रांसफार्मर खरीद ले।
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10 में से 4 मशीनें बरेली भेजी 
बांदा। बिजली की खींचतान से ठप पड़ी डायलिसिस यूनिट की चार मशीनें बरेली जिले में भेज दी हैं। अब यहां 6 डायलिसिस मशीनें बची हैं। यूनिट प्रभारी प्रदीप शुक्ला का कहना है कि यहां मरीजों की संख्या कम होने और बिजली आपूर्ति न मिलने से कंपनी ने चार मशीनें बरेली भेज दी हैं। डायलिसिस मरीजों की संख्या रोजाना 45 हो जाने पर यहां चार मशीनें और लगाकर यूनिट क्षमता 10 मशीनों की कर दी जाएगी। यह भी बताया कि एक रुपये के पर्चे में मरीज का डायलिसिस होगा।  

25 मरीजों ने कराया डायलिसिस का पंजीकरण 
बांदा। जिला अस्पताल में स्थापित डायलिसिस यूनिट की क्षमता 10 बेड की है। एक बेड सिरो पॉजीटिव के लिए आरक्षित है। नोडल अधिकारी डॉ. हृदयेश पटेल और यूनिट प्रभारी के मुताबिक अब तक 25 मरीजों ने पंजीकरण कराया है। यूनिट शुरू होने पर इन मरीजों का तीन शिफ्टों में सुबह 8 से 12 बजे, दोपहर 1 से शाम 5 बजे और शाम 6 से 10 बजे तक डायलिसिस होगा। तीन शिफ्टों में एक दिन में 18 मरीजों का इलाज हो सकेगा। उधर, यूनिट में अब तक नैप्रोलॉजिस्ट (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) की नियुक्ति नहीं की गई है। फिलहाल फिजीशियन ही तैनात हैं। 

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