बुंदेलखंड में फसल बर्बादी पर किसानों की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार को महोबा में एक किसान ने बर्बाद फसल देखकर खेत पर ही फांसी लगाकर जान दे दी, जबकि बांदा में दो किसानों की सदमे से मौत हो गई। एक किसान सदमे से कोमा में चला गया।
महोबा में पनवाड़ी के भरवारा गांव निवासी हरदयाल अहिरवार (60) पुत्र कूरा अहिरवार के पास आठ बीघा जमीन थी। उसने साहूकारों से एक लाख और यूपी इलाहाबाद ग्रामीण बैंक कुलपहाड़ से 35 हजार व छह हजार रुपये साधन सहकारी समिति भरवारा से लोन लिया था। कर्ज चुकाने के लिए गांव के ही कुछ किसानों की 30 बीघा जमीन एक लाख रुपये में ली थी। फसल अच्छी होने पर कर्ज अदायगी की उम्मीद थी, किंतु अतिवृष्टि के चलते 90 फीसदी फसल बर्बाद हो गई।
इससे परेशान होकर उसने खेत में लगे पेड़ पर फांसी लगा ली। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संतोष कुमार पालीवाल और पुलिस मौके पर पहुंची। एसडीएम मोहम्मद रिजवान ने बताया कि तहसीलदार रामजी को भरवारा भेजा गया है।
वहीं बांदा में बबेरू के मजरा कल्लाडेरा (काजीटोला) निवासी रामजियावन (65) खेत देकर घर वापस आने के बाद अचेत हो गए। घर वाले जब तक अस्पताल ले जाते, उनकी मौत हो गई।
पुत्र बड़कू ने बताया कि 12 बीघा जमीन पर बोई अरहर खराब होने वे दुखी चल रहे थे। पिता ने 2014 में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की पतवन गांव शाखा से 1.46 लाख रुपये का कर्ज लिया था। चिंता में वह चल बसे।
तीसरी घटना बबेरू क्षेत्र के ही शिव गांव में हुई। चुनुबदिया प्रजापति (62) खेत की हालत देखकर मायूस घर लौटा और बिस्तर पर लेट गया। घर वालों से पानी मांगा, लेकिन पानी पीने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। चुनुबदिया की पुत्री रोहणी की शादी तय हो चुकी है। 27 मई को टीका है।
फसल से बंधी उम्मीदें मटियामेट हो जाने पर से तगड़ा सदमा लगा। एसडीएम ने इस मामले में भी जांच के बाद उचित मदद का भरोसा दिलाया है। बुंदेलखंड किसान यूनियन मंडल अध्यक्ष भइयालाल पटेल के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने गांव आकर एसडीएम को ज्ञापन दिया।
इसी तरह फतेहपुर में मलवां ब्लाक के करनपुर में फसल बर्बादी देख किसान रामऔतार की हार्टफे ल होने से मौत हो गई। मृतक के बेटे चंद्रभान सिंह ने बताया कि उनके पिता खेत में गए थे। वहां फसलों को बर्बाद देख गिर पड़े। जब तक वे अस्पताल ले जाते, उनकी मौत हो गई।