जेएन कालेज की स्वर्ण जयंती समारोह के दूसरे दिन रविवार को शुरुआत पूर्व छात्र एवं शिक्षक सम्मेलन से हुई। रिटायर्ड प्रोफेसरों और पूर्व छात्रों ने महाविद्यालय से जुड़ी यादें साझा कीं।
इस संसार से विदा हो चुके पूर्व छात्रों और टीचर्स को श्रद्धांजलि दी गई। पुराने टीचरों ने अनुभव बताए, कहा कि कई-कई माह वेतन न मिलने पर भी पूरी श्रद्धा से पढ़ाते रहे।
शुरुआत बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी कुलपति प्रो. अविनाशचंद्र पांडेय ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप जलाकर की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह महाविद्यालय नई ऊंचाइयों को छुएगा।
संस्कृत के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रामऔतार त्रिपाठी ने महाविद्यालय से जुड़े संस्मरण सुनाए। सेवानिवृत्त प्रोफेसर वीएन राय (लखनऊ) ने कहा कि उनके समय में कई-कई माह तनख्वाह नहीं मिलती थी लेकिन कभी पढ़ाई में लापरवाही नहीं बरती।
मौजूदा शिक्षकों को छात्रों का भविष्य संवारने की नसीहत दी। पूर्व प्राचार्य डॉ. एसक्यू हसन ने कहा कि 1966 में जब वे यहां आए थे तो पुराने भवन के कमरे में प्याज भरा था। शिक्षकों और छात्रों ने सफाई कर उसे केमिस्ट्री लैब की शक्ल दी।
हिंदी के पूर्व विभागाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने काव्य रचना से महाविद्यालय का वर्णन किया और इसे विश्वविद्यालय बनाने की मांग उठाई।
पूर्व प्रवक्ता विद्यावती पांडेय, पूर्व सांसद रमेश चंद्र द्विवेदी, व्यापारी नेता संतोष गुप्ता, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष आशुतोष मिश्र, अवधेश सिंह, सुरेंद्र मिश्र (पप्पू), शैलेंद्र द्विवेदी शिल्लू, अशोक त्रिपाठी (इलाहाबाद) आदि ने भी संबोधित किया। संयोजक व प्राचार्य डॉ. नंदलाल शुक्ल ने सभी का आभार जताया। संचालन डॉ. ज्ञान प्रकाश तिवारी ने किया।