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समितियों, बैंक बकायेदार नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

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बांदा। शासन की गाइडलाइन के अनुसार, अब सहकारी समितियों का बकाया होने पर प्रत्याशी पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नामांकन में उन्हें एनओसी भी देनी होगी। जनपद में 47 सहकारी समिति व तीन बैंकों में करीब 63 करोड़ से अधिक किसानों का बकाया है। इसके पूर्व प्रत्याशियों से एनओसी नहीं ली जाती थी।
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जिले में 469 ग्राम पंचायत व 6153 वार्ड हैं। डीडीसी के 30 व क्षेत्र पंचायत के 750 वार्डों के लिए चुनाव होने हैं। अपर मुख्य सचिव (सहकारिता) एमवीएस रामी रेड्डी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कहा कि प्रदेश में किसानों का सहकारी समितियों व बैंकों में करोड़ों रुपये का ऋण बकाया है। सहकारी समिति और बैंक की बिना एनओसी के प्रत्याशियों का नामांकन न किया जाए।
इसके अलावा सहकारी समितियों व बैंकों को निर्देश दिए कि ऋण अदायगी के बाद एनओसी दी जाए। सहायक आयुक्त एवं निबंधक सहकारी समिति वीरेंद्र बाबू दीक्षित ने बताया कि जनपद में 47 सहकारी समिति व तीन बैंकों में किसानों का लगभग 63 करोड़ रुपये बकाया है। एनओसी की शर्त लागू हो जाने पर बकाये की बड़ी धनराशि वापस आने की उम्मीद है। संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं।
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गबन की जांच लंबित तो भी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
एडीपीआरओ रमोशचंद्र गुप्ता ने बताया कि जिन निवर्तमान ग्राम प्रधानों पर शासकीय धन के दुरुपयोग या गबन की जांच लंबित है वह चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ग्राम प्रधान गबन संबंधी धनराशि जमा कर देता है, तभी वह चुनाव लड़ सकेगा। निर्देश दिए हैं कि वह ग्राम पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों का निकाला गया पैसा शीघ्र जमा करा दें।
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