बांदा। पंडित जेएन डिग्री कालेज प्राचार्य आवास को लेकर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अदालत में चल रहे मुकदमे में अदालत ने वादी और महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा.नंदलाल शुक्ला के दावे/निषेधाज्ञा आदेश को खारिज कर दिया।
पूर्व प्राचार्य ने अपने सेवा काल के दौरान अप्रैल 2015 में तीन हजार रुपये प्रति माह किराये पर 25 वर्षों के लिए महाविद्यालय का प्राचार्य आवास की रजिस्ट्री/निबंधन तत्कालीन महाविद्यालय प्रशासक/एडीएम से कराई थी।
12 मार्च 2018 को पट्टे को प्राचार्य ने सरेंडर कर दिया था। पूर्व प्राचार्य ने अपनी याचिका में कहा था कि उन पर प्रशासक द्वारा दबाव डालकर पट्टा निरस्त कराया गया। जबकि वह अभी भी उसी भवन में निवास करते हैं।
सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अनुजा सिंह ने अपने 8 पृष्ठीय आदेश में कहा है कि वादी (तत्कालीन प्राचार्य) भवन में पट्टेदार के रूप में दाखिल हुए थे या महाविद्यालय के प्राचार्य के रूप में?
अदालत ने आदेश में यह भी कहा है कि वादी ने यह जानते हुए कि निकट भविष्य में उन्हें सेवानिवृत्त होना है दुरभिसंधि करके 25 वर्ष का प्राचार्य आवास का पट्टा करा लिया। विवादित भवन प्राचार्य आवास के रूप में आरक्षित था।
सिविल जज ने अपने आदेश में कहा है कि वादी का प्रार्थना पत्र जो स्थायी निषेधाज्ञा के लिए दिया गया है निरस्त किया जाता है। 5 जनवरी 2021 को इसकी फाइल पेश करने का आदेश दिया है।
उधर, प्राचार्य ने अपनी याचिका में कहा था कि वह भवन का किराया जमा करता रहा। जिसकी उसके पास रसीदे हैं। उस पर तत्कालीन अधिकारी के दबाव में सरेंडर ऑफ लीज को प्रशासन के दबाव में तहरीर किया गया। वह 30 जून 2020 तक प्राचार्य रहे।