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और भी घट गए काले हिरन व मोर

Fri, 02 Jan 2015 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बुंदेलखंड में वनों के साथ पशु-पक्षियों का भी सफाया हो रहा है। राष्ट्रीय पक्षी मोर से लेकर दुर्लभ प्रजाति के काले हिरन तक की संख्या साल दर साल घट रही है। जीवों की कमी के पीछे वन विभाग प्रदूषण और रेडिएशन बता रहा है।
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बुंदेलखंड के सभी जनपदों में वन मानक से काफी कम हैं। तेजी से हो रही अवैध कटान और पेड़ों के सफाए से पशु-पक्षी भी पनप नहीं पा रहे। हर पांच वर्षों में होने वाली पशु-पक्षी गणना इसका जीता जागता सुबूत है।

चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय के बांदा जनपद में राष्ट्रीय पक्षी मोरों की संख्या में पिछले पांच वर्षों में 42 फीसदी की जबरदस्त गिरावट हुई है। वर्ष 2009 में हुई गणना में इनकी संख्या 768 थी। हाल ही में वर्ष 2014 में हुई गणना में यह घटकर 444 रह गए हैं। इनमें 196 मादा मोर हैं। सबसे ज्यादा 260 मोर नरैनी क्षेत्र वन क्षेत्र में बताए गए हैं।
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तिंदवारी में 63, बबेरू में 51, बड़ोखर में 35, महुआ में 24 और जसपुरा ब्लाक में मात्र 11 मोर बचे हैं। सबसे ज्यादा कमी नरैनी क्षेत्र मेें आई है। वर्ष 2009 में यहां 460 मोर थे।

यही हाल दुर्लभ प्रजाति के काले हिरनों का है। यह जनपद में बड़ोखर खुर्द और तिंदवारी ब्लाक क्षेत्रों में पाए जाते हैं। वर्ष 2009 की गणना में इनकी संख्या 269 बताई गई थी। अब घटकर 61 रह गई है। बड़ोखर ब्लाक में 30 और तिंदवारी ब्लाक मेें 31 दुर्लभ प्रजाति के काले हिरन हैं।

हिरन की एक अन्य प्रजाति चिंकारा पूरे जनपद में मात्र 35 हैं। इनमें 13 मादा हैं। नरैनी क्षेत्र के डड़वामानपुर जंगल में तीन भालू भी हैं। इनमें दो नर और एक मादा है। बड़े कांटेदार साही 92 दर्ज हुई हैं। इनमें 67 नरैनी क्षेत्र मेें हैं।

उधर इस बारे में वन क्षेत्राधिकारी एनके सिंह को कहना है कि बढ़ते प्रदूषण और रेडिएशन से वन्य जीवों को ज्यादा खतरा हो रहा है। मोर का प्रजनन कम हो रहा है। मादा मोर में काफी कमी आई है। कमोवेश यही स्थित अन्य जीवों की है। 
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