बांदा। गली-कूचों का कूड़ा करकट और गंदगी साफ करने
वाले सफाई कर्मियों का पैसा खाने में आम आदमी भले ही परहेज करे पर सूदखोर
इन्हेें भी नहीं बख्शते। उनके लिए यह तबका ‘मुलायम चारा’ है।
अपनी
जरूरत के लिए मामूली रकम कर्ज पर लेकर सफाईकर्मी जिंदगी भर के लिए सूदखोरों
के चंगुल में फंस जाते हैं। हर माह उनका वेतन हथियाने के लिए उनकी बैंक
पासबुक सूदखोर अपने पास रखते हैं।
बैंक से पैसा निकालते ही सिर पर
सवार होकर सूदखोर मोटी रकम हथिया लेते हैं। महीने भर की मशक्कत की कमाई
गवां बैठे सफाईकर्मी सिर्फ हाथ मलते रह जाते हैं।
केस-1
30 हजार लिया, दो लाख दिया, 85 हजार बाकी
कैलाशपुरी
निवासी नगर पालिका के संविदा सफाईकर्मी कमलेश कुमार ने सूदखोर से पांच साल
पहले मां के इलाज के लिए 30 हजार रुपये कर्ज लिया था। 10 फीसदी मासिक
ब्याज तय था।
कमलेश अब तक दो लाख रुपये भर चुका है। सूदखोर की बही
में अभी भी 85 हजार रुपया बाकी है। हर महीने 8500 रुपया ब्याज के नाम पर
छीन लिया जाता है।
नगर पालिका से उसे 15000 रुपये मानदेय मिलता है।
ब्याज देने के बाद बचे 6500 में पूरे महीने परिवार का खर्च चलाना पड़ता
है। किसी भी महीने ब्याज में लेटलतीफी होने पर सूदखोर घर लिखा लेने की धमकी
देता है।
केस-2
मर गए कर्जदारों का भी सूद समेत हो रही वसूली
महिला
सफाईकर्मी सोनी (पहाड़ तले) ने वर्ष 2014 में पति को कारोबार कराने के लिए
साहूकार से 40 हजार रुपया कर्ज लिया था। 10 फीसदी ब्याज तय हुआ था।
उसकी
मां सुशीला और भाई जीतन ने भी मकान बनाने के लिए चार साल पहले 40-40 हजार
रुपये लिए थे। सुशीला और जीतन की मौत हो गई। साहूकार ने उन दोनों का कर्ज
भी सोनी के नाम दर्ज कर लिया।
अब वह 1,20,000 की कर्जदार है। जबरन
स्टांप पर लिखा भी लिया। सोनी बताती है कि अब तक 80 हजार रुपये दे चुकी है।
लेकिन मूलधन 1.20 लाख जस का तस बरकरार है। हर माह ब्याज के नाम पर 5500
रुपये सूदखोर वसूल रहा है। पिछले माह घर आकर धौंस धमकी और बदसलूकी की थी
केस-3
25 हजार के एक लाख वसूले, एक लाख बाकी
नगर
पालिका सफाई कर्मी कैलाश (छोटी बाजार) भी सूदखोरों के शिकंजे में है। दो
साल पहले इलाज के लिए उसने 10 हजार रुपये और उसकी मां सुशीला ने 15 हजार
रुपये लिए थे।
अब अपना और मां का दोहरा ब्याज पांच हजार रुपये
सूदखोर उसी से वसूल रहा है। हाल में घर बनवाने के लिए बैंक से एक लाख रुपया
लोन निकाला तो सूदखोर ने उसे भी छीन लिया।
अभी एक लाख रुपया और बाकी बता रहा है। बैंक की पासबुक भी अपने कब्जे में रख ली है। पूछने पर भी हिसाब-किताब नहीं बताता।
केस-4....
बेटी की शादी को कर्ज लेना पड़ा महंगा
महिला
सफाई कर्मी कमला (कैलाशपुरी) ने बेटी की शादी के लिए छह साल पहले सूदखोर
से 40 हजार रुपये लिए थे। पांच फीसदी मासिक ब्याज तय हुआ था। हर माह दो
हजार रुपये अदा करती रही।
अब तक 26 हजार रुपये से ज्यादा दे चुकी
है। मूलधन में अभी 30 हजार रुपये बाकी हैं। छह माह पहले एकमुश्त 10 हजार
रुपया दे दिया था। अभी भी उसे हर माह ब्याज देना पड़ रहा है।