बांदा। अन्ना गायों को बचाने के लिए अब धर्मगुरु भी
आगे आए हैं। लेकिन ‘धनगुरु’ अभी चुप्पी साधे हैं। पूंजीपति और संपन्न लोग
गोमाता के लिए मुट्ठी ढीली नहीं कर रहे। अलबत्ता साधारण घरानों के लोग गोधन
बचाने के लिए अपनी हैसियत के मुताबिक चारे, भूसे की कीमत दान कर रहे हैं।
बड़ोखर
खुर्द गांव में बनाए गए ‘काऊ गेस्ट हाउस’ में एक सैकड़ा से ज्यादा अन्ना
गायों को रोज भूसा, चारा दिया जाना जरूरी है, वरना भूख से इनकी मौत हो
जाएगी। ऐसे में इस गौशाला के संचालक किसान प्रेम सिंह ने तत्काल 50 कुंतल
भूसा की जरूरत बताई है। कुछ लोगों द्वारा गायों के लिए किए गए दान से भूसा,
पानी आदि प्रबंध किया गया है।
अन्ना गायों के लिए दान पुण्य करने
वाले मवेशियों के हमदर्द भूसा, चारा या इसकी कीमत पहुंचाने के लिए फोन
नंबर- 9415557444 (प्रेम सिंह, बड़ोखर) या फोन नबर- 05192-224521 (अमर
उजाला कार्यालय, बांदा, दोपहर 12 से शाम 3 बजे तक) पर संपर्क करें।
दानदाताओं
के नाम और फोटो बतौर उन्हें शाबासी व अन्य लोगों को प्रेरित करने के
उद्देश्य से ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित किए जाएंगे। बुधवार को बांदा शहर के
सौरभ साहू (सौरभ हैंडलूम, रामलीला रोड) ने भूसे के लिए 1000 रुपये दान किए
हैं।
बांदा। ज्योतिषाचार्य पंडित उमाकांत त्रिवेदी (क्योटरा, बांदा)
का कहना है कि गोवंश का महत्व भविष्य पुराण (शिव पुराण) में बताया गया है।
गायोें के लिए चारागाह का प्रबंध करने वाला सभी पापों से मुक्त होकर
विष्णु लोक में पूजित होता है।
जितने दिनों तक चारा व भूसा दान
करता है उससे हजार वर्ष तक स्वर्ग लोक में पूजित होता है। गो के चारागाह को
नष्ट करने वाले मनुष्य के कुल का नाश होता है।
अन्ना गायों के लिए
चारा, भूसा दान करने का कार्य सराहनीय है। इसमें सभी को बढ़ चढ़कर
भागीदारी करना चाहिए। हिंदू धर्म में किसी भी घर में रसोई बनती है तो सबसे
पहले गाय को रोटी निकालने की परंपरा है।
गाय में 33 करोड़ देवताओं
का वास है। भगवान राम और कृष्ण ने गो सेवा की है। भूखी गायों की सेवा व
उन्हें चारा-भूसा दान करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। घर में
धन-धान्य में वृद्धि होती है।
गोवंश की दुर्दशा से आ रहे संकट
बांदा।
ज्योतिषविद् पंडित कृष्ण कुमार त्रिवेदी (तिंदवारी) कहते हैं कि गाय ही इस
जीवन-मरण व भवसागर से मोक्ष दिला सकती है। गोवंश इस समय संकट में है।
उसकी
दुर्दशा का ही असर है कि तरह-तरह से प्रलय (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, भूकंप,
रोगों का प्रकोप) हो रहा है। संसार में गाय को उद्धारकर्ता कहा गया है।
गोवंश
को बचाने से सारे जीवन का महत्व है। गाय का गोबर, दूध, पेशाब, घी, पंचगव्य
से असाध्य रोग दूर होते हैं। गाय के दूध में स्वर्ण भस्म होता है। यह जीवन
बढ़ाता है।