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Banda News: कोहरा से घिरा बांबेश्वर पर्वत, गलन से ठिठुरे लोग

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फोटो - 17 शहर में सुबह 7:01 बजे महाराणा प्रताप चौक पर कोहरे में निकलते वाहन। संवाद
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फोटो - 18 कोहरे में घिरा बांबेश्वर पर्वत। संवाद

-70 से 100 प्रतिशत नमी, चना, मटर, मसूर, अरहर, सरसों व अलसी पर मौसम का प्रतिकूल प्रभाव
- सामान्य से छह डिग्री कम तापमान, जिला अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में बढ़े मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बांदा। कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और सर्द हवाओं ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार की सुबह ऐतिहासिक बांबेश्वर पर्वत भी घने कोहरे की चादर में लिपटा रहा, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई।
रिहायशी इलाकों में लोग कड़ाके की ठंड से ठिठुरते रहे, वहीं तापमान भी सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया। इस प्रतिकूल मौसम का सीधा असर दलहन और तिलहन फसलों पर पड़ रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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कृषि विश्वविद्यालय के कृषि एवं मौसम विभाग के विज्ञानी डॉ. दिनेश शाहा ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी ने सर्दी के असर को बढ़ा दिया है। इसी कारण शीतलहर और गलन का प्रकोप देखा जा रहा है। वर्तमान में अधिकतम तापमान माह के सामान्य 22.6 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है।
अधिक ठंड और कोहरे के कारण दलहनी फसलें जैसे चना, मटर, मसूर, अरहर और तिलहनी फसलें जैसे सरसों व अलसी पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। धूप की कमी या न मिलने के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मंद पड़ गई है, जिससे फसलों की बढ़वार रुक गई है। वातावरण में 70 से 100 प्रतिशत तक बनी अत्यधिक नमी के कारण फसलों में रोग व्याधियों का प्रकोप बढ़ गया है। कई जगहों पर फसलों के फूल झड़ने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जो सीधे तौर पर उपज को प्रभावित करेंगी।
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि एवं मौसम विभाग के विज्ञानी डॉ. दिनेश शाहा ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी ने सर्दी के असर को बढ़ा दिया है। इसी कारण शीतलहर और गलन का प्रकोप देखा जा रहा है। वर्तमान में अधिकतम तापमान माह के सामान्य 22.6 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है।
अधिक ठंड और कोहरे के कारण दलहनी फसलें जैसे चना, मटर, मसूर, अरहर और तिलहनी फसलें जैसे सरसों व अलसी पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। धूप की कमी के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मंद पड़ गई है, जिससे फसलों की बढ़वार रुक गई है। वातावरण में 70 से 100 प्रतिशत तक बनी अत्यधिक नमी के कारण फसलों में रोग का प्रकोप बढ़ गया है। कई जगहों पर फसलों के फूल झड़ने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
फसलों को बचाने के लिए यह करें

मौसम के इस मिजाज को देखते हुए डॉ. दिनेश शाहा ने किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी हैं। उन्होंने फसलों में फफूंदीनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी है ताकि रोगों के प्रकोप को नियंत्रित किया जा सके। गेहूं की फसल के लिए यह मौसम उपयुक्त है, इसलिए सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग अवश्य करें। वर्तमान तापमान छह डिग्री से ऊपर रहने और बादलों की आवाजाही के बावजूद, जनवरी के प्रथम सप्ताह में उत्तर पश्चिम से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण तापमान में गिरावट की संभावना है, इसलिए किसानों को पाला से बचाव के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
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स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां
वरिष्ठ ईएमओ डॉ. विनीत सचान ने किसानों और आम लोगों को ठंड से बचाव के लिए सुझाव दिए हैं। उन्होंने ऊनी कपड़ों, रबर के जूते और दस्ताने पहनने की सलाह दी है, विशेषकर सिंचाई के समय। खेतों में काम करने के लिए शिफ्टवार ड्यूटी लगाने का सुझाव दिया गया है ताकि किसी भी किसान को अत्यधिक ठंड में लंबे समय तक बाहर न रहना पड़े। खेतों में अलाव की व्यवस्था रखने और खाली पेट खेत न जाने की सलाह दी गई है। गुड़, मूंगफली जैसे गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने की भी सलाह दी गई है। यदि सर्दी लग जाए तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करने की बात कही गई है।
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