बांदा। दीपावली के बाद जिले में स्वच्छता अभियान
धड़ाम है। शहर हो या गांव की गलियां आतिशबाजी के कचरे से पटे हैं। गलियों
में लगा कचरे का ढेर बीमारियों को दावत दे रहा है।
नगर पालिका और
गांवों में तैनात सफाई कर्मचारी पर्व के बाद झाड़ू उठाने से परहेज कर रहे
हैं। जिम्मेदार अधिकारी भी सफाई में रुचि नहीं ले रहे हैं।
दीपावली
और धनतेरस पर्व के पहले जिले में स्वच्छ भारत मिशन ने जोर पकड़ा तो
अधिकारियों ने भी झाड़ू उठाकर वाहवाही लूटी, लेकिन पर्व के बाद अब अधिकारी
भी चुप हैं।
सफाई कर्मचारी पूरी तरह लापरवाह हैं। नगर पालिका में
करीब साढ़े चार सौ सफाई कर्मचारी हैं। नगर के प्रत्येक वार्ड में तैनात
सात-सात कर्मचारियों को हर माह वेतन दिया जा रहा है, लेकिन दो दिन से सफाई
व्यवस्था पटरी से उतरी है।
आतिशबाजी और पटाखों का कचरा नालियों व
गलियों में अटा पड़ा है। अलीगंज, छोटी बाजार, कालूकुआं, गायत्री नगर और
छोटी बाजार में हर गली में पटाखों का कचरा बीमारियों को दावत दे रहा है।
अधजले
पटाखों से बच्चों के जलने और हादसे का खतरा है, लेकिन नगर पालिका के
अधिकारी व कर्मचारी बेपरवाह हैं। उधर, गांवों में भी चुनावी बयार के चलते
सफाई व्यवस्था नजरंदाज है।
हफ्तों से गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर झाड़ू नहीं लगी। नालियां आतिशबाजी के कचरे से पटी हैं। घरों का पानी सड़कों पर बह रहा है।
ग्राम
पंचायत विभाग से जिले में करीब साढ़े सात सौ सफाई कर्मचारी तैनात हैं,
लेकिन ये सफाई में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। प्रधानों का चार्ज हटते ही
सफाईकर्मचारी झाड़ू उठाने से परहेज कर रहे हैं।