अतर्रा पी जी कालेज परिसर में बीते रविवार को नैक के निरीक्षण के चलते शीशम, सागौन, महुआ,कदंब आदि पेड़ों की कटान व छटान कराई गई थी। जिसके बाद सोमवार को सुबह काॅलेज परिसर में लकड़ी कटी पड़ी देख छात्रों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सपा के यूथ बिग्रेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नीरज द्विवेदी ने डीएफओ को मोबाइल से शिकायत की। थोड़ी देर बाद डिप्टी रेंजर विवेक कुमार मौके पर पहुंच जांच-पड़ताल की।
डिप्टी रेंजर ने प्राचार्य से पेड़ों की कटान के संबंध में आवश्यक कागजात मांगा। जिस पर प्राचार्य डा. गणेश शुक्ला ने डिप्टी रेंजर को बांदा कार्यालय में स्वीकृत पत्र उपलब्ध कराने की बात कही। वन विभाग में आवश्यक प्रपत्र न उपलब्ध होने पर मंगलवार देर शाम वन रक्षक अरुण कुमार ने पुलिस को तहरीर देते हुए प्राचार्य के विरुद्ध रिपार्ट दर्ज कराई है।
थाना प्रभारी ऋषिदेव का कहना है कि अवैध तरीके से पेड़ काटने की रिपोर्ट प्राचार्य अतर्रा पीजी कालेज के विरुद्ध दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है। उधर, प्राचार्य डॉ. गणेश शुक्ला ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी नहीं है।
प्रकरण उजागर होने के बाद वन विभाग ने इसे महज नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि पर्यावरणीय अपराध मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसडीओ (उप प्रभागीय वन अधिकारी) के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की जा रही है। यह टीम मौके का निरीक्षण करेगी, कटे हुए पेड़ों की वास्तविक संख्या, प्रजाति और उनके पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करेगी।
जांच टीम यह भी पड़ताल करेगी कि पांच पेड़ों के मूल्यांकन की अनुमति से अधिक पेड़ काटे जाने के पीछे किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस पूरे खेल में किसी विभागीय कर्मचारी की मिलीभगत या लापरवाही शामिल रही है। जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट डीएफओ (वन प्रभागीय अधिकारी) को सौंपेगी।
अतर्रा डिग्री कॉलेज प्रबंधन को केवल पांच पेड़ों के मूल्यांकन की अनुमति दी गई थी। जिसमें एक आम और चार सागौन के पेड़ शामिल थे। इसके बावजूद 16 हरे पेड़ों को काटा गया है। एफआईआर दर्ज कराई गई है और एसडीओ के नेतृत्व में जांच टीम गठित की जा रही है। किसी भी स्तर पर विभागीय कर्मचारी या अन्य किसी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- अरविंद कुमार, वन प्रभागीय अधिकारी