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कृषि अवशेष जलाया तो होगा जुर्माना

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पराली न जलाने के बारे में किसानों को जानकारी देते संयुक्त कृषि निदेशक विवेक कुमार सिंह। - फोटो : BANDA
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बांदा। राजधानी दिल्ली में छायी प्रदूषण की धुंध का असर उत्तर प्रदेश तक आ पहुंचा। बुंदेलखंड भी इससे अछूता नहीं रहा। यहां भी कई दिनों से हल्की धुंध और बादल हैं। इसके पीछे देश के कुछ हिस्सों में खेतों में जलाई जा रही पराली (फसल अवशेष) बताई जा रही है।
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राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) ने इस पर कड़ाई से रोक के आदेश दिए हैं। शासन के निर्देश पर चित्रकूटधाम मंडल आयुक्त ने कृषि और राजस्व विभाग को इस पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंडल के सभी जिलों में न्याय पंचायत स्तर पर कृषि और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को पराली की निगरानी के लिए तैनात किया जा रहा है। उल्लंघन करने वालों पर 2500 से 15000 रुपये तक जुर्माना होगा।
एनजीटी और शासन के आदेशों के बाद मंडलायुक्त ने कृषि विभाग को पराली पर रोक के आदेश जारी किए हैं। शनिवार को बांदा में हुई किसानों के साथ बैठक में मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक (जेडीए) विवेक कुमार सिंह ने एनजीटी और मंडलायुक्त तथा जिलाधिकारी के आदेशों का हवाला देकर कहा कि फसलों के अवशेष न जलाएं।
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उन्होंने कहा कि मंडल के सभी जिलों में उप कृषि निदेशकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि पराली पर नजर रखें। हर जिले में न्याय पंचायत स्तर पर क्षेत्रीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाएं। यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी फसल अवशेष/पराली न जलाई जाए।
चेतावनी दी कि इसका उल्लंघन हुआ तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई होगी। मंडलायुक्त ने भी मंडल के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि न्याय पंचायत स्तर पर राजस्व और कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों की संयुक्त ड्यूटी लगाकर उन्हें जिम्मा सौंपा जाए कि कहीं भी फसल के अवशेष न जल पाएं।
संयुक्त निदेशक ने बताया कि एनजीटी ने पराली जलाने पर जुर्माना निर्धारित किया है। दो एकड़ क्षेत्रफल तक पराली जलाने पर 2500 रुपये प्रति घटना। 2 से 5 एकड़ तक अपशिष्ट जलाने पर 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल पर अपशिष्ट जलाने पर 15 हजार रुपये जुर्माना किया जाएगा।
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