तिंदवारी। तेज हवा के साथ बहाव में नाव पाकिस्तान की सरहद पर पहुंच जाने से यहां के तीन मछुआरों को 4 वर्ष 3 माह पाकिस्तान की जेल भुगतना पड़ गई। पांच दिन पूर्व रिहा हुए ये मछुआरे रविवार की देर रात अपने घर लौट आए। अपने ‘लाल’ को देखकर माता-पिता की आंखें छलक आईं।
तिंदवारी क्षेत्र के जसईपुर, सिंघौली, महेंदू, धौसड़ गांव में मछुआरे हर साल ठेके पर मछली का शिकार करने गुजरात जाते हैं। 9 नवंबर 2017 को गुजरात के ओखा बंदरगाह के पास समुद्र में यहां के मछुआरों की नाव मछली का शिकार करते समय तेज हवा के झोंके में पाकिस्तान की समुद्री सीमा में दाखिल हो गई।
पाक सेना ने उन्हें घेराबंदी कर दबोच लिया। रिहा हुए मछुआरों के मुताबिक पाकिस्तान जेल में सवालों की झड़ी लगा दी गई। पहले एक दिन कराची में व अगले दिन लांडी जेल ले जाया गया। वहां उन्होंने 4 वर्ष 3 माह बिताए।
जसईपुर के मछुआरे विवेक पुत्र राम विशाल कुशवाहा, महेदू गांव के बाबू कुशवाहा पुत्र प्यारेलाल कुशवाहा, सिंघौली गांव के राजू कुशवाहा पुत्र विनोद कुशवाहा रविवार की देर शाम अपने घर लौट आए। मछुआरों ने अपने माता-पिता का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। सभी ने उन्हें गले लगा लिया। अपने बेटे विवेक को पाकर मां चंद्रकली की आंखें नम हो गईं।
जेल में करते थे पूजा-पाठ, ईद में खाते थे बिरयानी
तिंदवारी। भारत-पाक के बीच सरहद और सियासत को लेकर भले ही विवाद हो पर कराची की लांडी जेल में ऐसा कुछ नहीं दिखा। जसईपुर गांव के मछुआरे विवेक ने बताया कि जेल में काली माता और शिव जी का मंदिर है। वहां लोग रोजाना सुबह-शाम पूजा करते थे। जेल में ईद और अन्य त्योहारों में बिरयानी मिलती थी। होली और दिवाली के त्योहार में हम स्वयं पकवान बना लेते थे। जेल में प्रतिदिन सुबह दो घंटे हल्का-फुल्का काम जैसे सफाई आदि करते थे। त्योहारों में वह भी नहीं करनी पड़ती थी। होली में डेढ़ से 2 हजार बंदी एक साथ होली मनाते थे। त्योहारों में जेल के अंदर मौज मस्ती करने की छूट थी।
जेल में बनाया पर्स दिखाता विवेक अपने माता-पिता के साथ। संवाद- फोटो : BANDA