बांदा। महामारी की मार खत्म होते ही बुंदेलियों को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर फर्राटे मारने का सुखद मौका मिल सकता है। एक्सप्रेसवे पर यातायात आंशिक रूप से शुरू हो सकता है। इस वर्ष के अंत तक मुख्य कैरिज-वे पर वाहन दौड़ने के पूरे आसार हैं, जबकि पूरा एक्सप्रेसवे अगले वर्ष तैयार करने का लक्ष्य है। अब तक लगभग 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण की तेज रफ्तार में कोरोना कहर का असर तो पड़ा पर काम पूरी तरह ठप नहीं हुआ। इसका निर्माण करा रही कार्यदायी संस्था यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण) ने सातों जिलों में निर्माण कार्य जारी रखा।
ताजी सूचना यह है कि लगभग 60 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। चित्रकूट से इटावा तक बन रहे एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी पकड़े है। यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी ने हाल ही में कहा था कि एक्सप्रेसवे का निर्माण हर हाल में निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
296 किमी का निर्माण कर रहीं चार कंपनियां
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 296 किलोमीटर है। इसके निर्माण को चार भागों में बांटकर चारों पैकेज का निर्माण कार्य अलग-अलग कंपनियों को दिया गया है। सबसे ज्यादा तेज काम पैकेज चार में हो रहा है। यहां लगभग 74 फीसदी काम पूरा हो गया है। बड़े पुलों के निर्माण आधे से ज्यादा हो चुके हैं।
कोरोना के कहर में आई बाधाएं
करीब 14 माह से चल रहे कोरोना संक्रमण के दौर में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण में कई बाधाएं आईं। संक्रमण के चलते मजदूर कम हो गए। निर्माण में लगे वाहनों और मशीनों के ड्राइवर/आपरेटर भी कम मिले। कहीं निर्माण सामग्री पहुंचने में देर हुई, लेकिन काम नहीं रुका। कार्यदायी संस्था का कहना है कि महामारी की मुसीबत न आई होती तो तय समय से पहले काम खत्म हो जाता।
पीपीपी मॉडल पर चार जन सुविधा केंद्र
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चालू हो जाने पर इसमें पीपीपी मॉडल पर चार जन सुविधा केंद्र/परिसर बनेंगे। एक्सप्रेसवे की पहली वे-साइड बांदा के सरौली गांव में और दूसरी हमीरपुर के चिली गांव में बनेगी। इनके अलावा दो वे-साइड जालौन जिले में बनेगी। इनमें एक्सप्रेस वे पर चलने वाले यात्रियों और ड्राइवरों आदि के लिए कैंटीन, पुलिस चौकी, पेट्रोल पंप, वाहन मरम्मत आदि सुविधा उपलब्ध होगी। ये केंद्र 500 मीटर लंबे होंगे और 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनाए जाएंगे।
182 गांवों से गुजरा है एक्सप्रेस-वे
भरतकूप (चित्रकूट) से कुदरैल (इटावा) तक बन रहे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में बांदा के 28, चित्रकूट के 9, हमीरपुर के 29, जालौन के 64, औरैया के 37 और इटावा के 7 गांव शामिल हैं। कुल 182 गांव की 3655 हेक्टेयर भूमि एक्सप्रेसवे के लिए ली गई है।
छह लेन का बन रहा एक्सप्रेसवे
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे 6 लेन (110 मीटर) चौड़ा होगा। इसकी संभावित लागत 14716.26 करोड़ बताई गई है। निर्माण का काम एप्को इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, अशोका बिल्डिकॉन लिमिटेड, पावर कांस्ट्रेक्शन लिमिटेड और दिलीप बिल्डिकॉन लिमिटेड करा रही हैं।
एक्सप्रेसवे का स्ट्रक्चर
बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर चार रेलवे ओवरब्रिज, 11 बड़े पुल, 266 छोटे पुल, 18 फ्लाईओवर, छह टोल प्लाजा, सात रैंप प्लाजा आदि बन रहे हैं।