भूकंप के झटकों से ज्यादा पल-पल आ रही खबरों और उड़ रही अफवाहों ने हरेक की नींद उड़ा दी। ज्यादातर लोगों ने रात खुले आसमान तले बिताई। उधर, ठीक 24 घंटे बाद रविवार को फिर भूकंप के झटके ने पहले से ही खौफजदा लोगों को और दहशत में ला दिया। हर जुबान पर चौतरफा सिर्फ भूकंप (उर्दू भाषा में जलजला) की चर्चा है।
शनिवार को दोपहर 11:40 पर भारता और नेपाल के साथ बांदा की धरती भी डोल गई थी। घोषित तौर पर बुंदेलखंड भूकंप के खतरे से बाहर है। इसी के चलते यहां के लोग बेफ्रिक थे, पर इस झटके ने इस भरोसे को हिला कर रख दिया। दिलों में खौफ भर गया है।
शनिवार की दोपहर बाद तक रही अफरातफरी के बाद शाम को फिर खबर उड़ी की रात 10:37 बजे और फिर आधी रात के बाद धरती डोलेगी। नेट और सोशल मीडिया के जरिए यह खबरें जंगल की आग की तरह एक से दूसरे तक पहुंचीं। नतीजे में लोगों की नींद उड़ गई। भारी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ खुले मैदान या छत आदि में डेरा डाले रहे। लोगों ने पूजा-पाठ और दुआएं कीं। बमुश्किल रात कटी।
सुबह लोगों ने शुक्र मनाया कि रात खैरियत से कट गई। भूकंप को लेकर तरह-तरह की कयासबाजी का बाजार गर्म ही था कि रविवार को दोपहर करीब 12:43 बजे फिर धरती कांप उठी। हालांकि शनिवार की अपेक्षा कंपन कुछ कम था, लेकिन सहमे लोगों को होश उड़ गए। बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकल आए।
रविवार की छुट्टी होने से स्कूल और दफ्तर बंद थे। लिहाजा यहां सन्नाटा ही रहा। शहर की कांशीराम कालोनियों में रहने वाले लोग कई मंजिला बिल्ंिडग से उतरकर नीचे आ गए। भूकंप की चर्चा चौतरफा जारी है। अब यह भी खबर तेजी से उड़ रही है कि भूकंप अगले दो दिनों तक लोगों को हिला सकता है। बबेरू, नरैनी, अतर्रा, तिंदवारी, पैलानी, बदौसा, मटौंध आदि क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के मुताबिक गांवों में भी भूकंप की दहशत है।