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किसान कोमा में गया, जान बचाने को कीजिए मदद

Wed, 25 Mar 2015 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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मटियामेट हो गई फसल देखकर खेत में ही गिरकर बेहोश हो गया किसान अब कोमा में चला गया है। पहले ही कर्जदार परिवार उसके इलाज में 60 हजार रुपये का और कर्जदार हो गया।
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इसके बाद भी इलाज के लिए दो लाख रुपये की जरूरत बताए जाने पर लाचार परिजन किसान को बेहोशी अवस्था में ही कानपुर अस्पताल से वापस घर ले आए हैं। ऐसे में मदद के कुछ हाथ आगे बढ़ जाएं तो किसान की जान बच सकती है।

जसपुरा गांव में गोपाल सोनकर के पास 14 बीघा जमीन है। 12 मार्च को ओलावृष्टि से फसल की बर्बादी देखते ही गोपाल को खेत में चक्कर आ गए और वह वहीं गिरकर बेहोश हो गया। परिजन उसे जिला अस्पताल लाए। यहां ब्रेन हैमरेज बताकर कानपुर रिफर कर दिया गया।
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गोपाल के इकलौते पुत्र बिंद किशोर ने डीएम को दी अर्जी में बताया कि 60 हजार रुपये कर्ज लेकर कानपुर में इलाज कराया। फिर भी पिता को अभी होश नहीं आया। जान बचाने के लिए डाक्टर अभी दो लाख रुपये का खर्च और बता रहे हैं।

यह हैसियत घर वालों के पास नहीं है। इकलौता पुत्र घर में गुटखा, पान की छोटी सी दुकान रखकर गुजर कर रहा है। ऐसे में दो लाख का बंदोबस्त कहां से करे? मजबूर पुत्र गोपाल को बेहोश अवस्था में ही वापस घर ले आए हैं।

डीएम को दी अर्जी में पुत्र बिंद किशोर ने दो लाख रुपये मदद की फरियाद की है। डीएम ने इस अर्जी को एसडीएम के पास भेज दिया है। ऐसे हालात में किसानों की हमदर्दी का दम भरने वाले या मानवता के नाते लोगों की जान बचाने वाले कुछ लोग आगे आ जाएं और गोपाल के लिए आर्थिक मदद कर दें तो शायद वह होश में आकर दोबारा यह दुनियां देख सकेगा।

मदद करने के लिए किसान के पुत्र बिंद किशोर के फोन नंबर- 9793005680 पर संपर्क करें। किसान की जान बचाने वाले दानदाताओं के नाम यदि वह चाहेंगे तो प्रकाशित भी किए जाएंगे। ताकि अन्य लोग भी इससे प्रेरणा हासिल करें।

राजस्वकर्मियों को आयुक्त की चेतावनी
बांदा। मंडलायुक्त कल्पना अवस्थी मंडल के विभिन्न जनपदों में प्रतिदिन खेतों का निरीक्षण कर बर्बाद हुई फसलों का जायजा ले रही हैं। बांदा के कई गांवों के बाद मंगलवार को चित्रकूट जनपद के कई गांवों में निरीक्षण किया।

मंडलायुक्त ने उप जिलाधिकारियों और अन्य राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि सर्वे और सत्यापन में ईमानदारी और इंसानियत को अपनाते हुए मौके पर जाकर फसलों का सही और वास्तविक आंकलन करें।

उप जिलाधिकारियों से कहा है कि वह सर्वे और सत्यापन पर विशेष नजर रखें। रोजाना इसकी जानकारी उन्हें फोन पर दें। किसानों के उत्पीड़न की शिकायत पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

गरीब किसानों को बना दिया लखपति
बांदा। पैलानी के अलोना गांव के ग्रामीणों ने सामूहिक हस्ताक्षरों से डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा जारी की गई सूची में गरीब और अपात्र व्यक्तियों की आमदनी दो लाख रुपये से ज्यादा दर्शाई है।

ऐसे में उन्हेें आयकर दाता की सूची में शामिल कर दिया। ग्रामीणों ने पुन: सर्वे करवाकर सूची बनवाने की मांग की है। उधर, भारतीय किसान यूनियन मीडिया प्रभारी मोनू मिश्रा ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को 5000 रुपये पेंशन की प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा को यूनियन की पुरानी मांग बताया है। 
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