किसानों की हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही। तमाम किसान गांवों से अपनी उपज और दूध इत्यादि लेकर शहर में बेचने नहीं आए। सब्जियों की आवक पर भी असर पड़ा है। मंडल मुख्यालय सहित किसानों के आंदोलन की सुगबुगाहट गांवों तक पहुंच गई है। किसान नेताओं के जत्थे गांव-गांव पहुंचकर हड़ताल का माहौल गर्मा रहे हैं।
विभिन्न किसान संगठनों ने 28 मार्च से पांच दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इसके तहत गांवों से आने वाली विभिन्न वस्तुओं को शहर में आने से रोक दिया गया है। सबसे ज्यादा असर दूध आपूर्ति पर पड़ा है। शहर के आसपास के गांवों से आने वाले दूध विक्रेताओं को किसानों के जत्थे रोक रहे हैं। किसान सभा संयोजक रामचंद्र सरस, मदन भाई पटेल, बुंदेलखंड आजाद सेना के प्रमोद आजाद, संयोजक जयप्रकाश शिवहरे ने बताया कि हड़ताल 31 मार्च तक रहेगी। शासन और प्रशासन ने फिर भी तवज्जो नहीं दी तो अगली रणनीति बनाकर आंदोलन किया जाएगा। आसपास के गांवों डिंगवाही, महुआ, तिंदवारा, गोंड़ी बाबा, गंछा, हटेटीपुरवा, जमुनीपुरवा के अलावा कमासिन, नरैनी, अतर्रा आदि क्षेत्रों में भी किसान आंदोलन पनपने लगा है।
उत्तर प्रदेश किसान सभा के बैनर तले कमासिन कस्बे में किसानों ने गुरुवार को धरना दिया। यहां जंग बहादुर सिंह के नेतृत्व में धरना हुआ। धरने में उन्होंने कहा कि मांग पूरी न होने तक आंदोलन करते रहेंगे। सुनील कुमार, रामआसरे, श्रीनिवास उपाध्याय, जितेंद्र कुमार, देवराज, विकास तिवारी, महेश सिंह यादव, बबलू सिंह, शिवनरेश, बद्री प्रसाद, श्रवण कुमार, राजा फूल कुमार और वरुण कुमार आदि शामिल रहे।