बांदा। विद्याधाम समिति ने जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से किए गए सर्वे की रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले एक साल में जिले के 192 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें 75 महिलाएं हैं। इनमें 90 फीसदी किसानों पर बैंकों और साहूकारों का कर्ज था। दो साल से अधिकतर ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम ठप हैं।
अतर्रा स्थित समिति कार्यालय परिसर में शनिवार को बुंदेलखंड के प्रमुख मुद्दों एवं क्षेत्रीय समस्याओं पर चर्चा हुई। जनसंवाद में दिल्ली से आए वरिष्ठ लेखक भारत डोगरा भी सर्वे रिपोर्ट सुनकर दंग रह गए। कहा कि आत्महत्या रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति भयावह हो जाएगी। कर्ज में डूबे किसानों को उबरने के लिए प्राकृतिक खेती करनी होगी। इससे खेती की लागत कम होगी।
महाराष्ट्र में किसानों ने जैविक खादों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। थोड़ी सी भूमि पर किचन गार्डेन तैयार करके अपने उपयोग के लिए सब्जियां उगाई जा सकती हैं। समिति मंत्री राजाभइया ने कहा कि आंकड़े समिति की सर्वे रिपोर्ट व समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों से लिए गए हैं। संस्था ने वर्ष 2020 से अबतक के आत्महत्याओं के आंकड़े इकट्ठे किए हैं।
इस दौरान संगीताचार्य लल्लूराम शुक्ल, समाजसेविका माया श्रीवास्तव, पूर्व शिक्षक रामधनी यादव व भगवती प्रसाद, पूर्व प्रधान विजय बहादुर आदि ने अपने विचार रखे। संचालन मुबीना खातून ने किया। मौके पर सीमा, वर्षा, इमरान अली, शिव कुमार, रीना, मुबीन आदि उपस्थित रहे।