फसल बीमा पर चौतरफा उठ रहीं उंगलियाें और किसानों के विरोध के बाद केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि फसल बीमा योजना कारगर नहीं रही। केंद्र ने इस योजना के स्थान पर अब ‘आमदनी बीमा योजना’ लागू करने का निर्णय लिया है। यह 2-3 महीने में लागू हो जाएगी। यह बात केेंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को यहां किसान महापंचायत में संबोधन के दौरान कही।
रायफल क्लब ग्राउंड में केंद्रीय गृहमंत्री किसानों से सीधे रूबरू हुए। भाजपा ने इस आयोजन को किसान-मजदूर पंचायत का नाम दिया था। बड़ी संख्या में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए राजनाथ ने बेबाकी से स्वीकारा कि ओला, बारिश से फसलें बर्बाद हुई हैं।
किसानाें की दुर्दशा है। भारत सरकार ने यह मान लिया है कि फसल बीमा योजना कारगर नहीं है। लिहाजा अब इसके स्थान पर ‘आमदनी बीमा योजना’ लागू की जाएगी। इसमें किसानों के लिए 10,000 रुपये प्रति एकड़ आमदनी तय कर दी जाएगी। ताकि उन्हें ऐसी परिस्थितियों में नुकसान की भरपाई मिले। राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं वहां किसानों का कर्ज माफ कर दिया गया है।
लिहाजा यूपी सरकार को भी यह करना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि कृषि बीमा का सही क्रियान्वयन होता तो किसान आत्महत्या नहीं करते। किसानों की आत्महत्या के लिए यूपी सरकार पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि कृषि बीमा का लाभ यहां सही मिलता तो किसानों को यह कदम नहीं उठाना पड़ता। गृहमंत्री ने किसानों को यह भरोसा दिलाया कि वह बीमित किसानों को क्लेम न मिलने के मामले में बीमा कंपनी से बात करेंगे।