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एनओसी के लिए परिवार का भी भरना होगा बकाया बिल

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बांदा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मैदान में उतरने से पहले उम्मीदवारों को किसी प्रकार का कोई सरकारी बकाया न होने के संबंध में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना होता है। इसमें बिजली बिल बकाया प्रमुख है। अबकी शासन ने इसमें कुछ बदलाव किया है। अब उम्मीदवारों को बिजली विभाग से एनओसी तभी जारी होगी जब वे खुद और परिवार के सदस्यों का बिल जमा कराएंगे। इसके अलावा परिषदीय स्कूलों का बिजली बिल भरने की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम प्रधानों पर है।
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प्रधान समेत सभी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 25 दिसंबर को पूरा हो रहा है। कोरोना महामारी के बीच चुनाव होना संभावित है। ऐसे में बिजली विभाग के ‘मन की बात’ है कि वह इसे मौके के रूप में ‘कैश’ कराना चाहेगा। विभाग एनओसी उन्हीं को जारी करेगा, जिनका बिजली बिल पूरा जमा होगा। खुद के साथ परिवार के सदस्यों का भी बिल भरना होगा।
पहले प्रत्याशी अपना बिल जमा कर एनओसी प्राप्त कर लेते थे, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है। साथ ही अच्छा पंचायत प्रतिनिधि साबित करने के लिए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ग्रामीणों से भी बिजली बिल का भुगतान कराने का प्रयास करना होगा। हालांकि ग्रामीणों के बिल भरने को लेकर प्रधानों पर कोई दबाव नहीं है। न ही उनकी एनओसी पर कोई फर्क पड़ेगा। इसे अलावा जल संस्थान/जल निगम, दूरसंचार आदि विभागों का भी बकाया अदा करना होगा।
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स्कूलों का बिल भरने की प्रधानों पर जिम्मेदारी
बांदा। अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) अजय कुमार सविता ने चुनाव में नामांकन के साथ उम्मीदवारों को किसी प्रकार का कोई बकाया न होने की एनओसी देना होता है। बिजली विभाग से भी एनओसी जारी होती है। अब एनओसी प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार को खुद के साथ परिवार वालों का बिल भी जमा कराना होगा। परिषदीय स्कूलों के बिल भुगतान की जिम्मेदारी भी प्रधानों की है।
ग्रामीण उपभोक्ताओं पर 50 करोड़ बिल बकाया
बांदा। ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 2 लाख बिजली कनेक्शनधारक हैं। इनमें लगभग 50 फीसदी उपभोक्ताओं पर करीब 50 करोड़ रुपये बिल बकाया है। अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) ने बताया कि ग्रामीण में 2 लाख से ज्यादा उपभोक्ता हैं। इनमें लगभग एक लाख कनेक्शनधारक बकाएदार हैं। हरेक पर करीब 5 से 6 हजार रुपये बिल बकाया है। यह कुल 50 से 60 करोड़ रुपये होता है।
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