नरैनी तहसील के बरसड़ा मानपुर गांव में फसल बर्बादी के सदमे में आत्महत्या कर बैठे कर्जदार किसान की तेरहवीं भी अब कर्ज से होगी। 27 अप्रैल को होने वाली उसके बेटे की शादी भी टल गई है। आत्महत्या के चार दिनों बाद भी कोई अफसर मृतक किसान के परिजनों को सांत्वना देने नहीं आया। अलबत्ता मंगलवार को कांग्रेस नेता शोक जताने जरूर पहुंचे।
19 अप्रैल को किसान राजाराम यादव ने खेत मेें फसल कटाई के दौरान बालियों से दाने नदारद देख खेत के पास ही बबूल के पेड़ में फांसी लगा ली थी। फसल के साथ उसे अपनी बेटे की शादी के इंतजाम की चिंता भी थी। बेटे की शादी 27 अप्रैल को होनी थी।
मंगलवार को मृतक किसान के घर पहुुंचे कांग्रेस के प्रदेश संगठन मंत्री साकेत बिहारी मिश्र, सचिव पंकज सिंह और जिला महामंत्री रावेंद्र चतुर्वेदी से मृतक के पुत्र राजेश ने बताया कि घर में कुछ नहीं है। पिता की आत्मा की शांति के लिए शुद्धि और तेरहवीं तो करनी ही पड़ेगी।
इसके लिए गांव के लोगों से कर्ज मांगा जा रहा है। राजेश ने मायूसी भरे अंदाज में कहा कि अब तो कर्ज लेना और फिर उसे अदा करते रहना जिंदगी बन गया है। मृतक के बड़े भाई भोला यादव ने बताया कि उनके घर कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया।
पिता के नाम चार बीघा जमीन है। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक का एक लाख रुपये कर्ज है। बाबा सधुवा भी बैंक के सवा लाख के कर्जदार थे। 2005 मेें ग्राम प्रधान बने लेकिन ईमानदारी से प्रधानी निभाई। उनकी ईमानदारी के आज भी गांव में चर्चे हैं।