बांदा। सीएम और डीएम की सख्त चेतावनी बैंक प्रबंधकों पर बेअसर साबित हो रही हैं। इसकी ताजी बानगी नरैनी क्षेत्र के मानपुर गांव में देखने को मिली। यहां कर्ज के तनाव में फांसी लगाकर खुदकुशी कर बैठे किसान की मौत पर मिले पारिवारिक लाभ योजना के 30 हजार रुपये भी बैंक ने झटक लिए। तंगहाली से जूझ रहे आश्रितों को ठेंगा दिखाकर यह रुपये कर्ज के खाते में जमा कर लिए। मृतक किसान की विधवा की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बैंकों को सख्त चेतावनी दी थी कि किसानों का किसी भी प्रकार से उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। उसी के बाद डीएम सुरेश कुमार ने बैंक प्रबंधकों को खबरदार किया था कि किसानों से संबंधित कोई शिकायत मिली तो ब्रांच मैनेजर पर एफआईआर कराई जाएगी। सोमवार को यहां किसानों द्वारा
जिलाधिकारी सुरेश कुमार को दिए गए ज्ञापन में यह मामला भी शामिल रहा।
नरैनी क्षेत्र के मानपुर गांव में किसान राजाराम पर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक (जमवारा गांव ब्रांच) का डेढ़ लाख रुपये कर्ज था। लगातार दैवी आपदाओं से फसलें न होने से अदायगी नहीं हो पा रही थी। बैंक के दबाव से परेशान होकर राजाराम ने 19 अप्रैल 2015 को खेत मेें फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
घर के मुखिया (किसान) की आत्महत्या पर उसके परिजनों (विधवा) को पारिवारिक लाभ योजना से 30 हजार रुपये मिले थे। लेकिन यह पैसा पूरा का पूरा इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की जमवारा शाखा ने मृतक किसान के कर्ज खाते में जमा कर दिया। विधवा को नहीं दिया।
विधवा बेलपतिया ने डीएम को बताया कि वह बैंक के चक्कर लगाती रही। प्रबंधक ने उसे पैसा देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि पैसा कर्ज खाते में जमा कर लिया गया है। बेलपतिया अपने बच्चों के साथ तंगहाली से दिन गुजार रही है। विधवा की शिकायत को डीएम सुरेश कुमार ने गंभीरता से लिया है।
विधवा को भरोसा दिलाया है कि वह बैंक से यह पैसा वापस दिलाएंगे। साथ ही जांच के भी आदेश दिए हैं। डीएम से शिकायत के समय विधवा के साथ विद्याधाम समिति के राजाभइया भी उपस्थित रहे। हालांकि इस बारे में बैंक प्रबंधक से बात नहीं हो सकी।