बांदा। बुंदेलखंड के दूसरे सबसे बड़े स्टेशन बांदा को ए-ग्रेड मिलने के बाद पिछले महीने रेलवे ने इसे मॉडल स्टेशन बनाने की घोषणा की थी लेकिन फिलहाल इस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ। ए-ग्रेड का तमगा हासिल कर चुके स्टेशन में सुविधाएं बी-ग्रेड की हैं। स्टाफ की कमी से आरक्षण और बुकिंग के एक-एक काउंटर बंद पड़े हैं।
यहां रेलवे स्टेशन से रोजाना 10,000 से ज्यादा यात्रियों का आना-जाना होता है। ट्रेनों के जरिये मुंबई, कलकत्ता व दिल्ली महानगरों को जोड़ने वाला बुंदेलखंड का यह दूसरा बड़ा स्टेशन है। आरक्षण के दो काउंटरों में सिर्फ एक चालू है। साधारण बुकिंग के तीन काउंटर में एक बंद रहता है। इसकी वजह स्टाफ की कमी बताई जा रही है।
सबसे बड़ी समस्या पार्सल विभाग की है। प्लेटफार्म को जोड़ने वाला अंडर ब्रिज न होने से बड़े पार्सल एक से दूसरे प्लेटफार्म तक पहुंचाना कठिन होता है। स्टेशन में यात्रियों के लिए न कुर्सियां हैं न ही पीने के पानी का मुनासिब इंतजाम। महिला प्रतीक्षालय में पुरुषों व पुलिस वालों का कब्जा रहता है। द्वितीय श्रेणी प्रतीक्षालय में गंदगी की भरमार है। यहां व्यवस्थाएं चकाचक तभी होती हैं जब कोई बड़ा रेल अधिकारी निरीक्षण में आते हैं।
यह होनी चाहिए व्यवस्थाएं
24 घंटे पेयजल आपूर्ति, पार्सल व भारी सामान के लिए अंडर ब्रिज, फूड प्लाजा, 24 घंटे आरक्षण सेवा, तत्काल टिकट का अलग काउंटर, महिलाओं, विकलांगों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग टिकट खिड़की, 24 घंटे टिकट बुकिंग, सीसी कैमरे, आरपीएफ और जीआरपी में महिला आरक्षियों की तैनाती।
प्रबंधक ने माना सुविधाओं की कमी
बांदा। स्टेशन प्रबंधक बीपी वर्मा ने स्वीकारा कि मौजूदा समय में जो सुविधाएं मयस्सर हैं वह ए-ग्रेड की नहीं हैं। स्टाफ की कमी से टिकट काउंटर प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय स्टेशन की कमियों से उच्चाधिकारी अवगत हैं। निरीक्षण में आने वाले उच्चाधिकारियों को लगभग हर बार अवगत कराया जाता है। फिर भी पूरा प्रयास किया जा रहा है कि यात्रियों को समस्या न हो सके।