छतैनी की गोशाला में चरही में सूखा भूसा और नदारद पशु।
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अतर्रा। गोवंशों के नाम पर चारा-भूसा घोटाले के विधायक द्वारा की गई शिकायत पर जांच शुरू होते ही लीपापोती और बचाव के तरीके शुरू हो गए हैं। बैक डेट में पैसा खाते में भेजा गया है।
नरैनी तहसील के छतैनी गांव में अस्थाई बनाई गई गोशाला में गोवंश के लिए 4.27 लाख रुपये प्रति महीना जिला पशु चिकित्साधिकारी के यहां से दिया जाता था लेकिन यहां पशुओं को चारा-भूसा भी नहीं मिल पा रहा था। ग्रामीणों की शिकायत पर नरैनी के प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी ने जांच करके रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को फोटो सहित भेजी थी।
इस पर जिला पशु चिकित्सधिकारी ने दो माह का गोशाला बजट रोक दिया था। आरोप है कि सचिव और प्रधान ने शिकायत के चार दिन पूर्व बैक डेट में पैसा निकालकर तहसीलदार नरैनी के खाते में भेज दिया।
आरोप है कि एक ही भूसे के ढेर की कई बार फोटो भेजकर खरीद दिखा दी गई और लाखों रुपये निकाल लिए गए, जबकि मवेशी जंगल में घूमकर अपना पेट भरते रहें। विधायक राजकरन कबीर ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, मंडलायुक्त और डीएम को पत्र भेजकर की है। उधर, इस बार में खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।