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प्राइमरी की परीक्षा दे रहे सात बच्चे बीमार

Sat, 19 Mar 2016 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
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प्राथमिक विद्यालय, शुतुरखाना की बाउंड्री लांघकर आते-जाते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। परिषदीय स्कूलों की परीक्षा में मासूमाें के पसीने छूट रहे हैं। बिजली बगैर स्कूलों के कमरे बीमारी का घर बन गए हैं। शनिवार को प्राथमिक विद्यालय में परीक्षा दे रहे सात बच्चों की तबियत बिगड़ गई। उल्टी के साथ चक्कर आ गए। आनन-फानन में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। इनमें कई बच्चों को बुखार भी आ गया।
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शहर के अधिकांश स्कूलों में बिजली की वायरिंग पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन बिजली के कनेक्शन नहीं लिए गए। ऐसे में न तो पर्याप्त रोशनी है। न गर्म कमरों में हवा का इंतजाम। बच्चे पसीने में तर बतर होकर परीक्षा दे रहे हैं।

ताजी घटना में शनिवार को स्वराज कालोनी स्थित प्राथमिक विद्यालय में पहली पाली में गर्मी से सात बच्चे बीमार हो गए। चौथी और पांचवीं के इन बच्चों में सोनू, लवलेश, शीतल, अजीत, नेहा, प्रीती और कमलेश शामिल थे।
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प्रधानाध्यापक और स्कूल स्टाफ ने आनन-फानन उन्हें रेस्ट दिलाकर घर भेज दिया। इस स्कूल में बिजली की वायरिंग करा रखी गई है, लेकिन कनेक्शन नहीं है। इस कारण पंखे भी नहीं हैं।

प्राथमिक विद्यालय, शुतुरखाना में बच्चे बाउंड्री फांदकर बाहर जाते-आते मिले। यहां भी बिजली कनेक्शन नहीं है। कक्षा की खिड़की से आने वाली हवा और रोशनी में ही बच्चे परीक्षा देते रहे। उधर, प्राथमिक विद्यालय, बंगाली टोला में भी बिजली फिटिंग है, लेकिन कनेक्शन नहीं।

शासन ने परिषदीय स्कूलों की परीक्षा के लिए भले ही साढ़े 16 लाख रुपये एडवांस भेजे हों, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों को प्रश्नपत्र को छोड़कर अन्य सभी परीक्षा सामग्री जेब से खरीदनी पड़ रही है। दूसरी तरफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी का कहना है कि प्राइमरी में साढ़े सात रुपये और जूनियर में 15 रुपये प्रति बच्चे की दर से ई-पेमेंट के जरिये सभी स्कूलों की प्रबंध समितियों को पैसा भेजा जा चुका है।

बच्चों के बीमार होने के सवाल पर बीएसए ने कहा कि तत्काल उन बच्चों की तबियत के बारे में पता लगाने के लिए नगर शिक्षा अधिकारी को भेजा जा रहा है। स्कूलों में बिजली कनेक्शन न होने के सवाल पर बीएसए का कहना है कि इसका कोई प्रावधान नहीं है। न ही मुख्यालय से फंड आता है। वर्ष 2009-10 में अंबेडकर ग्राम योजना से कुछ ग्रामीण स्कूलों में कनेक्शन कराए गए थे। बजट आने पर बिल का भुगतान होता है।
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