बांदा। बुंदेलखंड में एक दशक में पौधरोपण पर खर्च हुए 80 करोड़ से ज्यादा रुपये में बरती गई अनियमितताओं की जांच मुख्य वन संरक्षक ने शुरू करा दी है। इसकी जांच चित्रकूट के उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके दीक्षित कर रहे हैं। पौधरोपण में अनियमितताओं की शिकायत करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर ने जांच अधिकारी को अभिलेखों का पुलिंदा सौंप दिया गया है। इसमें महालेखा परीक्षक (सीएजी) की वह रिपोर्ट भी दी है, जिसमें अनियमितताएं बरतने की बात कही गई है। उधर, बुंदेलखंड में हर साल लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं। बावजूद इसके बुंदेलखंड में वन क्षेत्र जस का तस है।
सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर ने गत 4 सितंबर को मुख्य वन संरक्षक से पौधरोपण में बड़े पैमाने पर घपले की शिकायत की थी। इस पर मुख्य वन संरक्षक ने चित्रकूट के प्रभागीय वनाधिकारी को जांच सौंपी है। हालांकि डीएफओ ने यह जिम्मेदारी अपने अधीनस्थ उप प्रभागीय वनाधिकारी (चित्रकूट) के हवाले कर दी है। मुख्य वन संरक्षक ने यह भी निर्देश दिया है कि इसकी गंभीरता से जांच कराएं। प्रभागीय वनाधिकारी ने वन संरक्षक के इन आदेशों का हवाला देकर आशीष सागर से समुचित साक्ष्य और शपथपत्र मांगा था।
इस पर आशीष ने उन्हें शपथपत्र सहित अभिलेखीय साक्ष्य सौंपे हैं। इसमें सागर ने बताया है कि वर्ष 2008-09 में बुंदेलखंड में विशेष पौधरोपण अभियान के तहत 10 करोड़ पौधे लगाए गए थे। इसमें 40 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च बताया था। इसका आडिट महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने किया था। बांदा में 2.92 करोड़, चित्रकूट में 5.77 करोड़, महोबा में 2.54 करोड़, हमीरपुर में 5.80 करोड़, जालौन में 5.87 करोड़, झांसी में 8.11 करोड़ और ललितपुर में 9 करोड़ रुपये खर्च बताए गए।
सीएजी ने इसमें अनियमितता और बगैर योजना के धन खर्च करने की रिपोर्ट दी थी। इसके अलावा वर्ष 2009-10 में बांदा-चिल्ला हाईवे पर महुआ, शीशम, आम, इमली, नीम, पीपल, जामुन, बरगद के 3534 पुराने पेड़ काटे गए। साथ ही सड़कों के किनारे पौधरोपण पर 87 लाख 51 हजार 300 रुपये खर्च दर्शाया गया। इसमें भी घोटाला हुआ है, इसकी स्थलीय जांच की जानी चाहिए। साथ ही बांदा और चित्रकूट वन प्रभाग ने वर्ष 2012 से 2017 तक 12 लाख 17 हजार 825 पौधों के रोपण पर 19 करोड़ 93 लाख 10 हजार रुपये खर्च दिखाया है।
जांच में मांग की गई है कि इनका स्थलीय सत्यापन किया जाए। इस वर्ष भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर बुंदेलखंड में एक करोड़ 44 लाख पौधे लगाए गए हैं। इनमें भी अनियमितता हुई है। सातों जिलों का स्थलीय सत्यापन और खर्च पैसों की जांच की जानी चाहिए।
बुंदेलखंड में नहीं बढ़ा वन क्षेत्र
आशीष सागर का कहना है कि एक दशक से भी ज्यादा समय से पौधरोपण अभियानों की पोल इसी तथ्य से खुलती है कि अभी भी बुंदेलखंड में मानक के मुताबिक वन क्षेत्र नहीं है। राष्ट्रीय वन नीति के तहत भू भाग की 33 फीसदी भूमि ग्रीन (हरित) होनी चाहिए, जबकि बांदा में 1.71 प्रतिशत, चित्रकूट में 21.8 प्रतिशत, हमीरपुर में 3.6 प्रतिशत, महोबा में 5.45 प्रतिशत, जालौन में 5.6 प्रतिशत, झांसी में 6.66 प्रतिशत और ललितपुर में मात्र 7.8 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं। करोड़ों पौधे लगाने के बाद भी किसी भी जिले में वन क्षेत्र नहीं बढ़ा है।
आरोप : जिस पर आरोप, उसी को सौंपी जांच
बांदा। मुख्य वन संरक्षक के आदेश पर पौधरोपण की हो रही जांच में शिकायतकर्ता आशीष सागर ने लिखित रूप से यह आपत्ति जताई है कि इसमें बड़े घोटाले के आरोपों की जांच उसी जिले के वन अधिकारी को सौंप दी गई जो जिला घोटाले में शामिल है। अपने पत्र में कहा है कि नियमानुसार सक्षम अधिकारी जैसे अपर मुख्य वन संरक्षक या संयुक्त जांच टीम को जांच दी जानी चाहिए थी। शासन का निर्देश है कि आरोपी व्यक्ति, अधिकारी या जिले को जांच अधिकारी नहीं बनाया जा सकता, लेकिन इस निर्देश का उल्लंघन किया जाना जांच की निष्पक्षता पर शंका पैदा कर रहा है।