बांदा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सभाजीत यादव ने कहा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा आर्थिक विषमता भारत में है। यहां 51 फीसदी चल और अचल संपत्ति देश के मात्र नौ औद्योगिक घरानों के हाथों में सिमट गई है। देश के 90 फीसदी लोगों के पास सिर्फ 5 फीसदी चल-अचल संपत्ति है। ये भुखमरी, कंगाली और बेबसी का जीवन जी रहे हैं।
पूर्व न्यायाधीश सोमवार को गंछा रोड स्थित आरएन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज बीएड कालेज में विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कहा कि देश में विकट आर्थिक मंदी है। इससे निजात पाना बड़ी चुनौती है। आजादी के 73 साल बाद भी देश की 38 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है।
शहर में रहने वाले प्रति व्यक्ति की प्रतिदिन आय मात्र 32 रुपये और देहात में सिर्फ 26 रुपये निर्धारित की गई है, जबकि गरीबी रेखा निर्धारण के मापदंड रोटी, कपड़ा, मकान के साथ बच्चों की पढ़ाई और सेहत पर भी आधारित होना चाहिए। बेरोजगारों में पांच फीसदी हर साल वृद्धि हो रही है। अब यह बढ़कर 6-7 फीसदी हो गई है। सार्वजनिक उपकरणों को बंद करने या निजी हाथों में बेचने से नौकरियों की संख्या घटी है।
पूर्व सांसद और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव राजाराम पाल ने कहा कि कांग्रेस ही देश को आर्थिक बदहाली से उबार सकती है। कांग्रेस प्रदेश महासचिव मनोज यादव और पूर्व मंत्री तथा महासचिव ध्रुवराम चौधरी, सूर्यबली निषाद (फतेहपुर), हाईकोर्ट अधिवक्ता विजय बहादुर यादव, वर्क काउंसिल महासचिव राधेश्याम यादव, कांग्रेस के प्रांतीय संगठन मंत्री साकेत बिहारी मिश्र, एचएल इंटर कालेज प्रधानाचार्य रामस्वरूप साहू, बबेरू अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष रणजीत सिंह यादव, डा.केपी सेन, सुरेश निषाद, भूपेंद्र यादव, आदित्य कुमार सिंह, राघवेंद्र सिंह, कौशलेंद्र सिंह, हीरा लाल यादव, अरमान खां, जयकरण वर्मा और दिनेश सिंह आदि अधिवक्ताओं ने भी संबोधित किया।
अध्यक्षता हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील वजाहत हुसैन खां ने की। मेजबान अधिवक्ता राजेश कुमार दुबे (भइया जी) ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक अधिवक्ता द्वारिकेश सिंह मंडेला और राममिलन सिंह पटेल ने संचालन के साथ आभार जताया।