अतर्रा महाविद्यालय में जल संचयन गोष्ठी को संबोधित करते आईपीएस अधिकारी महेंद्र मोदी।
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अतर्रा। अंधाधुंध जल दोहन से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इसे बचाने के लिए बारिश की प्रत्येक बूंद को संचित करना होगा। ये बातें उप महानिदेशक (सतर्कता) महेंद्र मोदी ने अतर्रा डिग्री कॉलेज में जल संचयन व संरक्षण गोष्ठी में कहीं।
उन्होंने प्रधानों, समाजसेवियों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को जल संरक्षण का महत्व बताया। कहा कि एक दशक में मानसून से मात्र 17 से 29 फीसदी बारिश हुई है। ऐसे में जल संरक्षण की महती आवश्यकता है। 1951 में देश में जल की उपलब्धता 5177 घन मीटर प्रति व्यक्ति की थी जो आज घटकर 1650 घन मीटर प्रति व्यक्ति हो गई है।
छह दशक पूर्व देश में 10 से 20 लाख तालाब थे। अब 4-5 लाख रह गए हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लिए उपयोग तालाबी माडल का प्रयोग करके वर्षा जल का साल भर के लिए संचय तथा सूखे कुओं का जल भरण किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त छतों का वर्षा जल संचयन (जल संतोष माडल) एवं टपक सिंचाई से जल की कमी को पूरा किया जा सकता है। श्री मोदी देश के 22 राज्यों व 140 स्थानों पर जल संरक्षण की तकनीक का विकास कर चुके हैं। जल संरक्षण पर उनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं।
झांसी के कई गांवों में उनके विकसित माडल संचालित हैं। सीडीओ रामकुमार सिंह ने जल संरक्षण की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। अध्यक्षता समाज सेवा संस्थान के गोपाल भाई ने की। डॉ.ओमप्रकाश सिंह, डॉ.आरसी अग्निहोत्री, डॉ.एके श्रीवास्तव, डॉ.हलीम खान मौजूद रहे।