बांदा। परिषदीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित करने की सरकार की मंशा में शिक्षकों की कमी रोड़ा बन गई है। इसमें शुरुआत से ही शिक्षकों का टोटा पड़ गया है। जिले में दो साल में 98 परिषदीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया गया है। इनमें 483 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन अंग्रेजी के जानकार 327 शिक्षक ही उपलब्ध हैं। 156 शिक्षकों की कमी है।
जिले में शैक्षिक सत्र 2018-19 में 40 प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया गया था। इनमें 201 शिक्षकों की तैनाती की जानी थी, लेकिन विभाग को बमुश्किल 125 शिक्षक ही उपलब्ध हुए। 76 शिक्षक खोजे नहीं मिले। दूसरे चरण 2019-20 के शैक्षिक सत्र में 58 परिषदीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में परिवर्तित किया गया। इनमें 282 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन 208 शिक्षक ही अब तक मिल पाए हैं। 80 शिक्षक कम हैं। इस प्रकार दोनों वर्षों में 156 शिक्षक नियुक्त नहीं हो पाए।
बबेरू विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय अरमार, जसपुरा के बरेहंडा, कमासिन के नारायणपुर, अंदौरा और मऊ विद्यालयों में पांच प्राथमिक व सात जूनियर स्कूलों में अब तक अंग्रेजी के शिक्षक नियुक्त नहीं हो पाए। हिंदी माध्यम के शिक्षकों से ही काम चलाया जा रहा है। उधर, दोनों सत्रों में 36 से अधिक अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को एकल शिक्षक ही संचालित कर रहे हैं। सात जूनियर विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं है।
बिना तैयारी के खोले अंग्रेजी स्कूल
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी का कहना है कि बिना किसी तैयारी के प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम विद्यालय खोले गए हैं। दो साल में विभाग मानक के अनुरूप अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों की तैनाती नहीं कर सका।
नियुक्ति के लिए होगी पुन: परीक्षा
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के लिए शिक्षकों से आवेदन लेकर उनकी परीक्षा कराई गई थी, लेकिन जितने अंग्रेजी शिक्षकों की जरूरत है, उतने परीक्षा में पास नहीं हो पाए। पुन: परीक्षा कराकर अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।-हरिश्चंद्र नाथ बीएसए, बांदा।