बांदा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण प्राप्त करने के बावजूद लगभग 20 फीसदी लाभार्थी रोजगार स्थापित नहीं कर रहे हैं। जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। इस समस्या से निपटने के लिए बैंकों ने लाभार्थी के द्वार नामक एक जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत बैंक अधिकारी सीधे लाभार्थियों के घर जाकर उन्हें रोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना पिछले वर्ष जनवरी माह में शुरू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि युवा अपने शहर या गांव में विभिन्न प्रकार के रोजगार स्थापित कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनें। अब तक प्रदेश में एक लाख से अधिक युवाओं को इस योजना से लाभान्वित कराया गया है। चित्रकूटधाम मंडल में अब तक 5205 युवा इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। इनमें से लगभग 80 फीसदी युवाओं ने सफलतापूर्वक अपना रोजगार स्थापित किया है, जबकि शेष 20 फीसदी लाभार्थी ऋण प्राप्त करने के बाद भी रोजगार शुरू नहीं कर पाए हैं।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, बैंक अधिकारियों ने लाभार्थियों को जागरूक करने और उन्हें प्रेरित करने के लिए लाभार्थी के द्वार कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के तहत, बैंक अधिकारी लाभार्थियों के घरों का दौरा कर रहे हैं और उन्हें रोजगार स्थापित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दे रहे हैं।
लाभार्थियों के सामने चुनौतियां
योजना के तहत ऋण लेने के बाद भी कई लाभार्थी विभिन्न व्यक्तिगत कारणों से रोजगार स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे ही कुछ मामले सामने आए हैं। यह मामले दर्शाते हैं कि लाभार्थियों को न केवल वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, बल्कि उन्हें अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने और योजना का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भी समर्थन की आवश्यकता है।
केस - 1
रामशंकर (पचुल्ला) : पिता की गंभीर बीमारी के कारण उन्होंने ऋण राशि में से दो लाख रुपये खर्च कर दिए। पिता के स्वस्थ होने के बाद, शेष तीन लाख रुपये से वे रोजगार शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
केस-2
कल्लू (जमालपुर) : उन्होंने साहूकारों का डेढ़ लाख रुपये का कर्ज चुकाने के लिए ऋण राशि का उपयोग किया। अब वह शेष राशि से एक टेलरिंग की दुकान खोलने के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश कर रहे हैं।
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ऋण का उपयोग उसी कार्य के लिए किया जाना चाहिए। जिसके लिए वह लिया गया है। उन्होंने कहा कि बैंक द्वारा लाभार्थियों को प्रेरित करने का यह प्रयास न केवल योजना के प्रचार-प्रसार में सहायक होगा, बल्कि लाभार्थियों को रोजगार स्थापित करने की सही राह भी दिखाएगा। युवाओं को इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाना चाहिए।
- संदीप कुमार गौतम, डीडीएम नाबार्ड
बैंक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युवा योजना का लाभ उठाने के बाद रोजगार स्थापित करें और आत्मनिर्भर बनें, जो कि सरकार की भी मंशा है। लाभार्थी के द्वार कार्यक्रम इसी उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- रवि कुमार, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक
लाभार्थियों के आंकड़े
जनपद
लाभान्वित
बांदा
1538
चित्रकूट
1281
महोबा
1338
हमीरपुर
1048
योग
5205